बिहार में सरकारी स्कूलों के शिक्षक (Teachers of government schools in Bihar) हड़ताल (strike) पर जा रहे हैं। सरकारी अनदेखी के खिलाफ शिक्षकों में जबरदस्त आक्रोश है। हर शिक्षकों की अपनी अपनी समस्या है। नियोजित शिक्षक (Niyojit Teachers) वेतनमान में भेदभाव के शिकार होते हैं तो नियमित शिक्षक पेंशन की अव्यवस्था के शिकार हैं। लेकिन शिक्षकों के हड़ताल (Strike of Government schoolsTeachers in Bihar) करने के तौर तरीकों से लगता है कि उनमें एकजुटता की कमी है। क्योंकि दोनों शिक्षक संघ अलग अलग तारीखों पर हड़ताल करने वाले हैं। जब सभी शिक्षकों का हित समान है, शिक्षक संघों का उद्देश्य एक है, सरकार से मांग एक है तो हड़ताल की तारीखों में अंतर क्यों है?
एकओर बिहार राज्य शिक्षक संघर्ष समन्वय समिति जहां 17 फरवरी से हड़ताल (Strike of Government schoolsTeachers in Bihar) पर जा रही है वही बिहार माध्यमिक शिक्षक संघ 25 फरवरी से हड़ताल पर जा रही है। शिक्षक संघ की आपसी एकता के अभाव में सरकार के विरुद्ध उनका प्रदर्शन कमजोर हो जाएगा।
देश में सातवें वेतनमान लागू करवाने के लिए राष्ट्रव्यापी आंदोलन चलाने वाले एआई फोटो के राष्ट्रीय महासचिव डॉ अरुण कुमार ने कहा है कि जब सभी शिक्षक संगठनों का उद्देश्य एक ही है तो अलग अलग तिथियों पर हड़ताल
(Strike of Government schoolsTeachers in Bihar) करने से सरकार के समक्ष उनका मतभेद ही उभर कर सामने आएगा। अगर सरकार इस बात को भाप लेती है  कि शिक्षकों की आपसी एकता कमजोर है तो  किसी भी हाल में उनकी मांगों पर ध्यान नहीं देगी। अगर सरकार को अपनी मांग पूरी करवाने के लिए विवश करना है तो सभी शिक्षकों को, दोनों शिक्षक संघों (Niyojit Teachers) को एकजुट होना ही पड़ेगा।  स्वभाविक है अगर नेताओं की व्यक्तिगत महत्वकांक्षा संगठन के  सिद्धांतों पर भारी पड़ने लगे तो असफलता (Strike of Government schoolsTeachers in Bihar) ही हाथ लगती है।
प्रोफेसर अरुण कुमार की बात जायज है और शिक्षक संघों के लिए उपयोगी भी है जिस तरह आज नियोजित शिक्षकों (Niyojit Teachers) को वेतनमान का न मिलना एक बड़ी समस्या है उसी तरह कभी पूरे देश के सरकारी कर्मचारियों के लिए सातवें वेतनमान को लागू करवाना भी एक चुनौतीपूर्ण काम था लेकिन डॉ अरुण कुमार ने राष्ट्रीय स्तर पर महाविद्यालयों के शिक्षकों को एकजुट करके संघर्ष किया तो सातवें वेतनमान का लक्ष्य हासिल हो पाया। आज उसी तरह के संघर्ष और एकता की आवश्यकता है।
यह चुनावी साल है। सरकार को विवश किया जा सकता है। कोई भी सरकार किस भीड़ से नहीं घड़बराती है बल्कि वह लोगों  की एकता के सामने झुक सकती है। इसलिए शिक्षकों (Niyojit Teachers) को समर्पण भावना से एकजुट होना पड़ेगा। अगर यह साल बीत गया, विधानसभा चुनाव खत्म हो जाने के बाद शिक्षकों के हितों की परवाह कौन करेगा ? इसलिए अभी वक्त है कि सभी शिक्षक एकजुट होकर संघर्ष करें। डॉक्टर अरुण कुमार कहते हैं कि किसी भी नेता के व्यक्तिगत ईगो या उनकी महत्वाकांक्षा शिक्षकों (Niyojit Teachers) के हितों से बड़ी हो ही नहीं सकती।  हर हाल में शिक्षकों (Strike of Government schoolsTeachers in Bihar) का हित ही सर्वोपरि होता है।
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