पटना (Patna) में लगभग 20 दिनों तक रहे जल जमाव के बाद नगर विकास विभाग ने प्रथम दृष्टया कई लोगों पर कार्रवाई की थी. इस बाढ़ (Flood In Patna) से पटना के लोगों को करोड़ों रुपए का नुकसान हुआ था.

पटना. पटना (Patna) खूब पानी-पानी हुआ था. ये घटना थी पिछले साल यानी 2019 के सितम्बर महीने की जब बिहार (Bihar) की राजधानी पटना में जल सैलाब (Flood) आया था. 27 सितम्बर की रात की बारिश ने ऐसा कहर बरपाया था कि करीब 15 लाख की आबादी प्रभावित हुई थी. इस बारिश से जहां करोड़ों का नुकसान हुआ था वहीं कई इलाकों में तो 20 दिन तक पानी जमा रहा था.

14 अक्टूबर को सीएम ने दिए थे जांच के आदेश

इस बाढ़ से सरकार की जम कर फजीहत हुई और 14 अक्तूबर को मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने उच्च स्तरीय बैठक कर इसके जांच का आदेश दिया था. मुख्य सचिव दीपक कुमार के निर्देश पर चार सदस्यों की कमिटी बनी जिसमें पथ निर्माण विभाग के प्रधान सचिव अमृत लाल मीणा, आपदा प्रबंधन सचिव प्रत्यय अमृत और वित्त सचिव एस सिद्धार्थ थे. इस कमिटी की अध्यक्षता विकास आयुक्त अरूण कुमार सिंह कर रहे थे.

इन दो अधिकारियों को बताया गया दोषी
अब इस कमिटी ने जल प्रलय का मुख्य दोषी पूर्व नगर निगम आयुक्त अनुपम सुमन और तत्कालिक बुडको एम डी अमरेन्द्र प्रसाद सिंह को ठहराया है. पटना नगर निगम और बुड्को के बीच तालमेल नहीं था जिस कारण राजधानी से पानी का निकासी समय पर नहीं हो सकी. नगर निगम ने सभी नालों की उड़ाही सही ढंग से नहीं की. उड़ाही में सिर्फ खानापूर्ति की गई और कहा जा रहा है कि जल निकासी के लिये पूर्व से कोई तैयारी नहीं थी.

11 अफसरों पर हुई थी कार्रवाई

जांच रिपोर्ट आने के बाद सामान्य प्रशासन विभाग ने नगर विकास विभाग को कार्रवाई की अनुशंसा कर दी है. इन दो अधिकारियों के अलावा कई और अधिकारी और कर्मचारी इस मामले में दोषी पाये गये हैं. इस पूरे जल जमाव के बाद नगर विकास विभाग ने प्रथम दृष्टया कई लोगों पर कार्रवाई की थी. बुड्को के 11 अधिकारी जिसमें एक चीफ इन्जीनियर, दो सुपरिटेंडेट इन्जीनियर और सात एक्जिक्यूटिव इन्जीनियर शामिल थे पर कार्रवाई हुई. पटना नगर निगम ने दो एक्जिक्यूटिव इन्जीनियर, एक सिटी मैनेजर और 6 सेनिटरी इंस्पेक्टर के खिलाफ भी कार्रवाई की थी.कुछ का हुआ था तबादला

नीतीश के अफसरों के कारण ही डूबा था पटना, जांच रिपोर्ट में हुआ खुलासा

नीतीश के अफसरों के कारण ही डूबा था पटना, जांच रिपोर्ट में हुआ खुलासा
file photo

पटना (Patna) में लगभग 20 दिनों तक रहे जल जमाव के बाद नगर विकास विभाग ने प्रथम दृष्टया कई लोगों पर कार्रवाई की थी. इस बाढ़ (Flood In Patna) से पटना के लोगों को करोड़ों रुपए का नुकसान हुआ था.

  • NEWS18 BIHAR
  • LAST UPDATED: FEBRUARY 7, 2020, 10:59 AM IST
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पटना. पटना (Patna) खूब पानी-पानी हुआ था. ये घटना थी पिछले साल यानी 2019 के सितम्बर महीने की जब बिहार (Bihar) की राजधानी पटना में जल सैलाब (Flood) आया था. 27 सितम्बर की रात की बारिश ने ऐसा कहर बरपाया था कि करीब 15 लाख की आबादी प्रभावित हुई थी. इस बारिश से जहां करोड़ों का नुकसान हुआ था वहीं कई इलाकों में तो 20 दिन तक पानी जमा रहा था.

14 अक्टूबर को सीएम ने दिए थे जांच के आदेश

इस बाढ़ से सरकार की जम कर फजीहत हुई और 14 अक्तूबर को मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने उच्च स्तरीय बैठक कर इसके जांच का आदेश दिया था. मुख्य सचिव दीपक कुमार के निर्देश पर चार सदस्यों की कमिटी बनी जिसमें पथ निर्माण विभाग के प्रधान सचिव अमृत लाल मीणा, आपदा प्रबंधन सचिव प्रत्यय अमृत और वित्त सचिव एस सिद्धार्थ थे. इस कमिटी की अध्यक्षता विकास आयुक्त अरूण कुमार सिंह कर रहे थे.

इन दो अधिकारियों को बताया गया दोषी

अब इस कमिटी ने जल प्रलय का मुख्य दोषी पूर्व नगर निगम आयुक्त अनुपम सुमन और तत्कालिक बुडको एम डी अमरेन्द्र प्रसाद सिंह को ठहराया है. पटना नगर निगम और बुड्को के बीच तालमेल नहीं था जिस कारण राजधानी से पानी का निकासी समय पर नहीं हो सकी. नगर निगम ने सभी नालों की उड़ाही सही ढंग से नहीं की. उड़ाही में सिर्फ खानापूर्ति की गई और कहा जा रहा है कि जल निकासी के लिये पूर्व से कोई तैयारी नहीं थी.

11 अफसरों पर हुई थी कार्रवाई

जांच रिपोर्ट आने के बाद सामान्य प्रशासन विभाग ने नगर विकास विभाग को कार्रवाई की अनुशंसा कर दी है. इन दो अधिकारियों के अलावा कई और अधिकारी और कर्मचारी इस मामले में दोषी पाये गये हैं. इस पूरे जल जमाव के बाद नगर विकास विभाग ने प्रथम दृष्टया कई लोगों पर कार्रवाई की थी. बुड्को के 11 अधिकारी जिसमें एक चीफ इन्जीनियर, दो सुपरिटेंडेट इन्जीनियर और सात एक्जिक्यूटिव इन्जीनियर शामिल थे पर कार्रवाई हुई. पटना नगर निगम ने दो एक्जिक्यूटिव इन्जीनियर, एक सिटी मैनेजर और 6 सेनिटरी इंस्पेक्टर के खिलाफ भी कार्रवाई की थी.कुछ का हुआ था तबादला

राज्य सरकार ने तत्कालीन नगर विकास विभाग सचिव का तबादला आईटी विभाग में कर दिया और बुड्को के एमडी अमरेन्द्र प्रसाद सिंह को बिहार राज्य पथ परिवहन में भेज दिया गया था. अब जब पटना में आए बाढ़ की जांच रिपोर्ट आई है तो दोषियों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई की तैयारी भी है. खबर ये भी है की ये रिपोर्ट कमिटी ने 16 दिसंबर को ही सरकार को सौंपी है और अब कार्रवाई का इन्तजार हैं क्योंकि नीतीश कुमार की छवि को भी पटना के इस पानी ने खूब धोया था.​
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