मुजफ्फरपुर अल्पावास गृह से मुक्त करायी गई बांग्लादेशी महिला अब भी अपनों से दूर है। वह पिछले दो साल से बेगूसराय के अल्पावास गृह में रहने को मजबूर है। ऐसा तब है जबकि बांग्लादेश में महिला का घर और उसके परिजनों का पता चल चुका है।
वह फोन से अपनों से बात भी करती है। एक-दो बार बहन और बहनोई भी आकर मिल चुके हैं, लेकिन दो देशों का मामला होने के कारण महिला अपने घर नहीं जा पा रही है। इस मामले को डीएम स्तर पर गृह विभाग से बातचीत हो चुकी है। बता दें कि मुजफ्फरपुर बालिका गृह कांड के मुख्य अभियुक्त ब्रजेश ठाकुर सहित सभी को साकेत कोर्ट ने सजा सुनायी है। 11 फरवरी को ही यह फैसला आया।
अपनों से बात कर सिर्फ रोती है
बेगूसराय के अल्पावास गृह में आने के बाद फेसबुक के माध्यम से बांग्लादेशी महिला के परिजनों का पता लगाया गया। इसके बाद महिला अपनों से फोन पर बात भी करती है, लेकिन घर न जाने की विवशता पर जार-जार रोती है।
ब्रजेश के अल्पावास गृह में पासपोर्ट तक छीन लिया गया था
बांग्लादेशी महिला चार वर्षों से ब्रजेश ठाकुर के अल्पावास गृह में रह रही थी। महिला के अनुसार वह कोलकाता से पटना आयी थी। पटना एयरपोर्ट पर ही एक ऑटो चालक ने कुछ नशा खिला दिया। जब उसे होश आया तो वह ब्रजेश ठाकुर के अल्पावास गृह में थी। यहां उसका पासपोर्ट और वीजा तक रख लिया गया। इसके कारण वह चाहकर भी अपने घर नहीं जा सकी। 2018 में मुजफ्फरपुर बालिका गृह कांड उजागर हुआ तो अल्पावास गृह से भी महिलाओं और लड़कियों को शिफ्ट किया गया। बालिका गृह की पीड़िताओं को मोकामा के नाजरथ शेल्टर होम और अल्पावास गृह की पीड़िताओं को बेगूसराय अल्पावास गृह में रखा गया। इनमें अधिकतर पीड़िताओं को पुनर्वासित किया जा चुका है। लेकिन बांग्लादेश की महिला अपने घर नहीं जा पा रही है।
बेगूसराय अल्पावास महिला गृह में बांग्लादेश की एक महिला है। वह अपने देश लौटना चाहती है। इसके लिए जिला प्रशासन की ओर से महिला विकास निगम को पत्र भेजा गया है। गृह मंत्रालय से दिशा निर्देश मिलने के बाद ही जिला प्रशासन उसे मुक्त करेगा।
- अरविंद कुमार वर्मा, डीएम, बेगूसरराय
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