अपर जिला और सत्र न्यायाधीश द्वितीय कृष्ण प्रताप सिंह की अदालत ने मॉब लिंचिंग में आठ अभियुक्तों को आजीवन कारावास और 10-10 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई। जुर्माना नहीं दिये जाने पर सजा की अवधि एक-एक वर्ष अतिरिक्त होगी।
सभी अभियुक्त आदिवासी समुदाय के हैं। इन सभी अभियुक्तों को दोषी करार देते हुए पिछले मंगलवार 18 फरवरी को न्यायिक हिरासत में ले लिया गया था। हत्या की नृशंसता को देखते हुए अपर लोक अभियोजक प्रणव कुमार ने न्यायालय से फांसी की सजा की मांग की थी। मॉब लिंचिंग का यह मामला ठाकुरगंज थाना क्षेत्र के बेरबन्ना गांव का है।
9 दिसंबर 2010 की रात यहीं के मोफीजउद्दीन नामक व्यक्ति को अभियुक्तगण पंचायती के बहाने बुलाकर ले गये थे। तीर गोदकर और हाथ पैर तोड़कर उसकी हत्या कर दी थी। मृतक मोफीजउद्दीन की पत्नी समसूजहां के बयान पर प्राथमिकी दर्ज की गई थी और पुलिस ने भी घटना को सत्य बताते हुए न्यायालय में आरोप पत्र समर्पित किया था। न्यायालय में विचारण के दौरान गवाहों के बयान व अपर लोक अभियोजक प्रणव कुमार के ठोस अभियोजन के आधार पर सभी आठ अभियुक्तों लखीराम, सुनील सोरेन, मंगल हेम्ब्रम, बबलू सोरेन, जन मरांडी, मास्टर सोरेन, बैजू मुर्मू व ताला मुर्मू को दोषी करार देते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई। सजा सुनाने के दौरान सैकड़ों लोगों की भीड़ न्यायालय परिसर में मौजूद थी। 
 
आजीवन कारावास की सजा सुनाने के बाद अभियुक्तों को हिरासत में लेती पुलिस।
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