हिंदुस्तानी अवाम मोर्चा (HAM) के राष्ट्रीय अध्यक्ष जीतन राम मांझी ने आरोप लगाया है कि बिहार में शराबबंदी बेअसर है। साथ ही उन्होंने यह भी दावा किया कि सरकार के सभी मंत्रियों, विधायकों और अफसरों के घरों पर छापेमारी करे, अगर वहां से शराब की बोतलें नहीं मिलीं तो मैं राजनीति से संन्यास ले लूंगा। 
जीतन राम मांझी ने सोमवार को सरकारी आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि शराबबंदी क़ानून से सिर्फ गरीब, दलित, पिछडों और आदिवासी प्रताड़ित हो रहे हैं। इस क़ानून के तहत वही लोग जेल भेजे गए हैं। 
जीतन राम मांझी ने सरकार से पूछा कि बताए कि अब तक कितने विधायक, मंत्री, सांसद, विधान पार्षद, आईएएस और आईपीएस अफसर के आवास पर छापेमारी हुई है। क्या ऐसे तमाम लोग कभी शराब नहीं पीते थे, जो अचानक से छोड दिए? आखिर सरकार उनके घरों में छापेमारी से क्यों डर रही है?
शराबबंदी को लेकर पहले भी दे चुके हैं बयान
इससे पहले भी जीतन राम मांझी शराबबंदी को लेकर दिए गए बयान के कारण सुर्खियों में आए थे। उन्होंने कहा था, 'दारू कभी-कभी दवा के रूप में भी पेश की जाती है। मुझे इसका अनुभव है। बहुत पहले मैं हैजा से पीड़ित था, तब एक नुस्खे ने मुझे बचा लिया।' मांझी आगे कहते हैं, 'थोड़ा शराब पीना काम करने वाले श्रमिकों के लिए संजीवनी के बराबर होता है, जो दिनभर कमरतोड़ मेहनत कर अपने घर लौटते हैं।'
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