• विपक्ष और सत्तापक्ष के विधायकों के बीच नोक-झोंक और धक्का-मुक्की हुई
  • विधानसभा अध्यक्ष ने एनपीआर पर लाए गए कार्यस्थगन प्रस्ताव को मंजूर किया
पटना. बजट सत्र के दूसरे दिन बिहार विधानसभा में सीएए और एनपीआर के मुद्दे पर जोरदार हंगामा हुआ। तेजस्वी यादव ने सीएए को काला कानून बताया तो सत्तापक्ष के विधायक विरोध करने लगे। सत्तापक्ष के विधायकों ने कहा कि तेजस्वी ने संविधान का अपमान किया है। वह अपनी बात वापस लें, इस पर विपक्ष के विधायक भी अपनी जगह पर खड़े हो गए और हंगामा करने लगे।
विधानसभा अध्यक्ष विजय चौधरी ने विधायकों से शांत होने की अपील की, लेकिन हंगामा जारी रहा। इसके बाद विधानसभा को स्थगित कर दिया गया। हंगामे के दौरान सत्ता पक्ष और विपक्ष के विधायक आमने-सामने आ गए। दोनों ओर से नोकझोंक होने लगी। बात धक्का-मुक्की तक पहुंच गई। विधानसभा अध्यक्ष ने राजद की ओर से एनपीआर पर लाए गए कार्यस्थगन प्रस्ताव को मंजूर कर लिया है।
15 मई से शुरू हो जाएगा एनपीआर
सदन से बाहर मीडिया से तेजस्वी यादव ने कहा कि ‘राजद, सीपीआई-माले और कांग्रेस ने एनपीआर को लेकर कार्यस्थगन प्रस्ताव लाया था। सदन के अंदर भाजपा के गुंडों ने अपने चरित्र को उजागर किया है। यह एनडीए की सरकार है, लेकिन सदन के अंदर ऐसा लग रहा था कि भाजपा और जदयू अलग-अलग है। मुख्यमंत्री ने कुछ दिन पहले बयान दिया था कि एनपीआर 2010 के अनुसार होना चाहिए। मेरा सवाल है कि क्यों एनपीआर को लेकर नीतीश कुमार ने गजट नोफिकेशन जारी कराया? नोटिफिकेशन के अनुसार, एनपीआर 15 मई से चालू हो जाएगा। सरकार बताए कि यह 2010 के अनुसार होगा या केंद्र द्वारा बनाए गए नए फॉर्मेट के अनुसार। नीतीश कुमार भाषण में कहते हैं कि 2010 के अनुसार एनपीआर होना चाहिए। नीतीश विधानसभा में यह पारित कराएं कि 2010 के अनुसार ही एनपीआर होगा। सिर्फ भाषण देने से काम नहीं चलेगा।’ 
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