चुनावी रणनीतिकार और हाल ही में जदयू से निष्कासित किये गये प्रशांत किशोर दिल्ली चुनाव में आप के चुनावी कैम्पेन से फुर्सत पाने के बाद बिहार की राजनीति में अपनी सक्रियता बढ़ायेंगे। वे मंगलवार को पटना पहुंचने के बाद मीडिया के समक्ष अपनी आगामी रणनीति का खुलासा करेंगे। 
गौरतलब हो कि जदयू में राष्ट्रीय उपाध्यक्ष रहते हुए उन्होंने दल के निर्णयों से इतर जाकर एनआरसी और सीएए के विरोध में मुहिम चला रखी थी। दिल्ली में जदयू और भाजपा की दोस्ती और गृहमंत्री अमित शाह को लेकर बयान दिए थे। इसकी वजह से जदयू ने पवन वर्मा और उन्हें 29 जनवरी को पार्टी से निष्कासित कर दिया था। तब पीके ने अपनी प्रतिक्रिया में कहा था कि दिल्ली चुनाव बाद पटना आने पर इसका जवाब दूंगा। 
प्रशांत किशोर के पटना पहुंचने की सूचना से विपक्ष और खासकर महागठबंधन के दलों में फुसफुसी तेज हो गयी है। उनके किसी न किसी दल से जुड़ने को लेकर भी कयासबाजी का दौर आरंभ हो गया है। हालांकि खुद प्रशांत किशोर ने सोमवार को मीडिया से बातचीत में साफ कर दिया कि वे न तो कोई पार्टी बनाने जा रहे हैं और न ही किसी दल से जुड़ने जा रहे हैं। राजनीतिक कार्यकर्ता के रूप में काम करेंगे। बिहार में अधिकाधिक समय देंगे। गौर हो कि पीके अगले दस साल में बिहार में नौजवान लीडरशिप तैयार करने को लेकर काफी समय से काम कर रहे हैं और इनके साथ काफी संख्या में युवा जुड़े हैं। 
प्रशांत किशोर ने ने पिछले दिनों बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के उस बयान का जवाब दिया था, जिसमें कहा गया था कि जिसे पार्टी से जाना है वो जाए। प्रशांत किशोर ने ट्वीट में नीतीश कुमार को लिखा था कि आपकी ओर से खराब कोशिश है, मुझे अपने रंग में रंगने की। प्रशांत किशोर ने लिखा था कि आप मुझे जेडीयू में क्यों और कैसे लेकर आए, इसको लेकर इतना गिरा हुआ झूठ बोल रहे हैं। आपकी ओर से खराब कोशिश है, मुझे अपने रंग में रंगने की। यदि आप सच बोल रहे हैं तो कौन विश्वास करेगा कि आपमें इतनी हिम्मत है कि अमित शाह के भेजे गए शख्स की न सुनें।
नीतीश कुमार ने कहा था कि बीजेपी नेता अमित शाह के कहने पर प्रशांत किशोर को जेडीयू में लिया, और अब जिसे जहां जाना है, जा सकता है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने संवाददाताओं से बातचीत के दौरान प्रशांत किशोर और पवन वर्मा के संबंध में पूछे जाने पर कहा, 'जिसे जहां जाना है जाए। हमारे यहां ट्वीट के कोई मतलब नहीं हैं। जिसे ट्वीट करना है करे। हमारी पार्टी में बड़े और बुद्धिजीवी लोगों की जगह नहीं है। सब सामान्य और जमीनी लोग हैं।'
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