स्पांसरशिप योजना के तहत जेल में बंद कैदियों के बच्चों सहित अन्य बच्चों को आर्थिक मदद की जाएगी। इसके लिए अधिकारी जेल में कैदियों से संपर्क कर बच्चों की जानकारी लेंगे। प्रखंड स्तर पर इसके लिए अभियान चलाया जाएगा।
इस योजना के तहत बच्चों के पढ़ने, आहार सहित अन्य कामों के लिए दो हजार रुपये प्रतिमाह देने का प्रावधान है। 18 साल से कम उम्र के बच्चों को दो साल तक आर्थिक मदद दी जाएगी। समिति की अनुशंसा पर एक साल अवधि में विस्तार किया जा सकता है। जिसकी मां बेवा या तलाकशुदा है या बच्चा अनाथ है या जिसके माता-पिता दुर्घटना या मानसिक बीमारी से ग्रसित हों या बच्चे के माता-पिता में से कोई जेल में बंद है और अन्य परिजन काम करने की स्थिति में नहीं है। वैसे बच्चों को भी इस योजना का लाभ दिया जाएगा। बच्चों का चयन करने के लिए एक समिति का गठन किया गया है। इसमें बाल संरक्षण इकाई की सहायक निदेशक को अध्यक्ष बनाया गया है। समिति में चार सदस्य बनाये गये हैं।
बाल संरक्षण इकाई की सहायक निदेशक मेरी लता किस्कु ने बताया कि योजना को लेकर विभाग स्तर से प्रशिक्षण दिया गया है। बच्चों की पहचान करने के लिए प्रखंड स्तर पर अभियान चलाया जाएगा। इसके अलावा जेल में जाकर कैदियों से उनके बच्चों के बारे में जानकारी ली जाएगी। बच्चों की पहचान करने के बाद प्रस्ताव समिति के समक्ष रखा जाएगा। एक सप्ताह के अंदर बच्चों के चयन की प्रक्रिया शुरू कर दी जायेगी। इसका मुख्य मकसद अनाथ बच्चों की मदद करनी है ताकि उसकी शिक्षा और स्वास्थ्य से संबंधित समस्याओं को दूर किया जा सके। 18 साल से अधिक उम्र होने या माता-पिता के जेल से निकलने या स्वस्थ होने पर योजना का लाभ वापस ले लिया जाएगा।
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