सरकारी स्कूलों में मिड डे मील योजना ने विद्यार्थियों की उपस्थिति तो बढ़ा दी लेकिन भोजन की गुणवत्ता पर सवाल भी उठ रहे हैं। हिन्दुस्तान ने विशेषज्ञों की टीम के साथ बिहार के नौ स्कूलों में मध्याह्न भोजन बनाने, परोसने, साफ-सफाई, सामग्री भंडारण आदि की पड़ताल की। इस दौरान कहीं हरी सब्जियां नदारद मिलीं तो साफ-सफाई का ध्यान बिल्कुल नहीं दिखा। 
मुजफ्फरपुर के शेखुपर प्राथमिक विद्यालय में मेन्यू में था चावल, दाल और हरी सब्जी। लेकिन हरी सब्जी की जगह आलू की भुजिया बनाई जा रही थी। बर्तन इतने गंदे थे कि छूना मुश्किल था। दाल में पानी अधिक था। विशेषज्ञ टीम ने गुणवत्ता और गंदगी को लेकर कई सवाल खड़े किए। मधुबनी शहर के गांधी बाजार नगरपालिका मध्य विद्यालय में मेन्यू के हिसाब से खाना बन रहा था। टीम ने वहां की व्यवस्था, सफाई और गुणवत्ता पर संतोष जताया। लेकिन अनाज और खाद्य सामग्री के भंडारण की व्यवस्था को और दुरुस्त करने को कहा।  बिहारशरीफ के रहुई प्रखंड के मोरा तालाब स्कूल में चावल-दाल व सब्जी की मात्रा कम थी। 
मध्याह्न भोजन का मेन्यू
सोमवार: चावल, मिश्रित दाल और हरी सब्जी 
मंगलवार: जीरा चावल, सोयाबीन आलू की सब्जी 
बुधवार और शनिवार: खिचड़ी (हरी सब्जी युक्त), चोखा, केला या मौसमी फल 
गुरुवार: चावल, मिश्रित दाल और हरी सब्जी 
शुक्रवार: पुलाव, काबुली चना या लाल चने का छोला, हरी सलाद, अंडा या मौसमी फल  
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