लॉकडाउन की घोषणा के साथ ही प्रधानमंत्री ने कहा था कि आने वाले दिन बेहद महत्वपूर्ण हैं और संक्रमण को फैलने से रोकने के लिए हर देशवासी इसका पालन करें.
लेकिन बीते दो दिनों में दिल्ली, हरियाणा और उत्तर प्रदेश की सीमाओं पर जिस तरह लोगों का जमघट दिखा, उससे लॉकडाउन पर सवाल उठने लगे हैं.
सैकड़ों की संख्या में लोग अपने घरों को लौट रहे हैं.
कुछ पैदल निकल गए तो कुछ बसों और ट्रकों पर लदकर-लटककर. कोरोना वायरस के संक्रमण से बचने के लिए एक-दूसरे से दूर रहना सबसे महत्वपूर्ण माना जा रहा है.
लेकिन जिस तरह से लोग झुंड में साथ में लौट रहे हैं उससे कोरोना वायरस के संक्रमण रोकने की लड़ाई कमज़ोर होती दिख रही है.
लॉकडाउन के बाद दिल्ली से लौटने वालों में बिहार के लोग भी बड़ी संख्या में हैं. क्या बिहार में इन्हें अपना घर जाने दिया जा रहा है?
बिहार सरकार ने लॉकडाउन के दौरान दिल्ली, सूरत, राजकोट, चेन्नई और देश के तमाम दूसरे शहरों से राज्य में आ रहे हर आदमी, औरत और बच्चे को 14 दिन तक क्वारंटीन में रखने का आदेश दिया है.
बिहार सरकार के स्वास्थ्य विभाग के प्रधान सचिव संजय कुमार ने बीबीसी को बताया, "बिहार में प्रवेश के सारे एंट्री प्वॉइंट सील कर दिए गए हैं. व्यवस्था की गई है कि वहीं से वाहनों के ज़रिए सभी को उनके घर के पास बने अस्थायी क्वरंटीन केंद्रों पर ले जाया जाए और 14 दिनों तक सबको उन्हीं केंद्रों पर रखा जाए. हर ज़िले के ज़िलाधिकारी को इसकी ज़िम्मेदारी दी गई है."
28 मार्च को स्वास्थ्य विभाग की ओर से जारी आंकड़ों के अनुसार बिहार के 8386 ग्राम पंचायतों के 6893 स्कूलों में अस्थायी क्वरंटीन सेंटर बनाए गए हैं.
बिहार में कोरोना वायरस के लिए गठित टीम की नोडल अफ़सर डॉक्टर रागिनी के मुताबिक "बिहार में कोरोना वायरस से संक्रमित लोगों की कुल संख्या 11 हो गई है. अभी तक 630 के क़रीब सैंपल जांचे गए हैं."
नए संक्रमित मरीज़ों के बारे में बताते हुए डॉ. रागिनी ने कहा, "एक ऐसी महिला में संक्रमण की पुष्टि हुई है जो उस अस्पताल के कर्मी की रिश्तेदार हैं जहां राज्य के पहले मरीज़ का शुरुआती इलाज हुआ था."
इस बीच सोशल मीडिया पर कई ऐसे वीडियो पोस्ट किये गए जिसमें स्वास्थ्य विभाग की लापरवाही और अस्पतालों में टेस्ट किट की कमी और दूसरे सुरक्षा उपकरणों की कमी की बात कही गई.
बिहार सरकार में स्वास्थ्य विभाग के प्रधान सचिव संजय कुमार के मुताबिक़ "करीब 10 हज़ार से अधिक टेस्ट किट पुणे से पटना लाए गए हैं. अब जांच में दिक्कतें नहीं आएंगी. आरएमआरआई के अलावा एम्स और डीएमसीएच में भी किट्स भेजी गई हैं. अब वहां भी जांच हो सकेगी."
बिहार की राजधानी पटना राज्य का सबसे अधिक प्रभावित इलाक़ा है. राज्य के सभी 11 मामलों में से छह पटना के ही हैं.
पटना ज़िला प्रशासन ने फुलवारी शरीफ़ और पटना सिटी को अति संवेदनशील घोषित किया है. इन इलाक़ों के 12 वार्डों के सभी लोगों को होम क्वरंटीन कर दिया गया है.

लॉकडाउन से खेतिहर और किसान बाहर

बिहार सरकार के कृषि मंत्री प्रेम कुमार ने शनिवार को आदेश जारी करते हुए कहा कि उन लोगों पर किसी तरह की कार्रवाई न की जाए जो खेती के काम से बाहर निकल रहे हैं.
लेकिन उन्होंने इस बात पर ज़रूर ज़ोर दिया कि उन्हें कोरोना वायरस संक्रमण को लेकर WHO द्वारा निर्देशों का पालन करना होगा.
ज़िला कृषि पदाधिकारियों को इस बाबत निर्देश दिए गए हैं कि वे किसानों तक यह सूचना पहुंचाएं जिससे फसल कटाई का काम बाधित न हो.
यह भी कहा गया है कि किसानों को खेती का काम मशीनों से करने के लिए अधिक से अधिक प्रेरित किया जाए ताकि कम से कम लोग शामिल हो सकें.

एक महीने में पांच हज़ार लोग आए विदेश से आए

पिछले एक महीने के दौरान बिहार में लगभग पांच हज़ार लोग विदेश से आए हैं, जिनकी जांच नहीं हो सकी है.
राज्य के मुख्य सचिव दीपक कुमार ने बताया कि राज्य सरकार ने बाहर से आए सभी लोगों की जानकारी और सूचना हासिल कर ली है.
हर ज़िले की लिस्ट बनाकर डीएम को इन सभी लोगों को होम क्वरंटीन पर भेजने की ज़िम्मेदारी दी गई है.
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