कोरोना वायरस को लेकर देश भर को लॉक डाउन कर दिया गया है. बिहार में भी इसका काफी असर देखा जा रही है. लॉक डाउन के बीच बिहार के नियोजित शिक्षकों ने 31 मार्च को यान कि कल उपवास में रहने का आह्वान किया है. इसके साथ ही प्रदेशभर के शिक्षक 2 अप्रैल को वेदना दिवस मनायेंगे. हालांकि शिक्षकों ने यह भी कहा कि आपदा की इस घड़ी में हड़ताली शिक्षक समाज के साथ है.
शिक्षक हड़ताल पर सरकार के चुप्पी से लॉकडाउन में चल रहे शिक्षकों में व्यापक आक्रोश है. जनवरी महीने के वेतन भुगतान को तोहफा बता रहे सरकार के आलाअफसरों के बयान पर हड़ताली शिक्षकों ने नाराजगी प्रकट की है. सहायक शिक्षक- राज्यकर्मी का दर्जा पूर्ण वेतनमान व सेवाशर्त की मांग पर शिक्षक फरवरी मध्य से ही हड़ताल पर हैं. लेकिन सरकार हड़ताली शिक्षकों से बात नही कर रही है. इन मसलों को लेकर शिक्षक लॉकडाउन में भी अपना आक्रोश प्रकट करने से नही रुक रहे हैं हड़ताली शिक्षकों ने घर को ही आंदोलनस्थल बनाकर अपनी आवाज उठानी शुरु कर दी है. इसी क्रम में हड़ताली शिक्षक समूहों ने कोरोना संकट में शिक्षकों के प्रति उपेक्षापूर्ण सरकारी व्यवहार के खिलाफ हड़ताली 4 लाख शिक्षक सपरिवार अपने घर में बैठ उपवास करेंगे. वहीं 2 अप्रैल को शिक्षक वेदना दिवस मनाते हुए अपने घरों में अपने अपने धर्मानुसार पुजा, हवन, नमाज, अरदास करते हुए सरकार के संवेदनशीलता की कामना करेंगे. इस बाबत जानकारी देते हुए टीइटी और एसटीइट उतीर्ण नियोजित शिक्षक संघ के प्रदेश प्रवक्ता अश्विनी पांडेय ने कहा कि शिक्षक आपदा की इस घड़ी में हड़ताली शिक्षक समाज के साथ है. बिहार का शिक्षक समाज धैर्य और साहस के साथ जनता के समक्ष आये कोरोना संकट और अपने साथ हो रहे भेदभाव का मुकाबला कर रहा है. सरकार को मानवता को ध्यान में रखते हुए दो महीने का वेतन भुगतान करना चाहिए. 
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