जीत के प्रमाणपत्र के साथ एनडीए के नवनिर्वाचित सांसद।राज्यसभा के लिए सभी पांच उम्मीदवार निर्विरोध चुनाव जीत गए। छठा उम्मीदवार नहीं आने के कारण चुनाव की नौबत ही नहीं आई। बुधवार को तीन बजे नाम वापस लेने की अवधि खत्म होते ही सभी पांच उम्मीदवारों की जीत की विधिवत घोषणा की गई। विधानसभा के सचिव बटेश्वरनाथ पांडेय ने जीत का प्रमाणपत्र दिया। सोमवार को स्क्रूटनी में सभी पांचों उम्मीदवारों का नामांकन वैध पाया गया। एनडीए ने तीन और राजद ने दो उम्मीदवारों को मैदान में उतारा था।
सभी निर्विरोध जीते
जदयू से राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश और रामनाथ ठाकुर को जबकि भाजपा ने वर्तमान सांसद डॉ. सीपी ठाकुर के पुत्र पूर्व विधान परिषद सदस्य विवेक ठाकुर को टिकट दिया था। राजद से प्रेमचन्द्र गुप्ता और अमरेन्द्र धारी सिंह ने नामांकन किया था। नामांकन वैध होने के बाद ये सभी निर्विरोध जीत गए।
बिहार से राज्यसभा की पांच सीटें खाली हुई हैं। तीन जदयू के और दो भाजपा सदस्य 9 अप्रैल को रिटायर होंगे। राज्यसभा के उपसभापति व जदयू के हरिवंश नारायण सिंह, रामनाथ ठाकुर, कहकशां परवीन जबकि भाजपा के आरके सिन्हा और डॉ. सीपी ठाकुर का कार्यकाल समाप्त हो रहा है। ये पांचों एनडीए के हैं। हालांकि इनमें एनडीए को तीन सीटें ही वापस मिली। दो सीट जदयू को और एक भाजपा को मिली। फायदा राजद को हुआ। उसे दो अतिरिक्त सीटें मिली।
बिहार से राज्यसभा में 16 सीटें हैं। इनमें जदयू के छह, भाजपा के चार, राजद के तीन, लोजपा और कांग्रेस के एक-एक सदस्य हैं। एक सीट खाली है। राज्यसभा की एक सीट के लिए 41 विधायकों के समर्थन की दरकार है और इस लिहाज से रिक्त होने वाली पांच सीटों में दो-दो जदयू व राजद को जबकि एक सीट पर भाजपा की जीत पहले से तय थी।
चुनाव होता तो भी यही परिणाम
राज्यसभा के लिए यदि चुनाव होता तो भी यही परिणाम होता। विधानसभा में दलीय सदस्यों की संख्या के अनुसार परिणाम में कोई उलटफेर की संभावना नहीं थी। जीत के लिए 41 विधायकों के समर्थन की जरूरत थी और विधानसभा में सदस्यों के अनुसार जदयू-राजद के दोनों और जबकि भाजपा के एकमात्र उम्मीदवार की जीत तय थी।
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