राज्य के स्वास्थ्य संस्थानों में कार्यरत डॉक्टरों व कर्मियों के डयूटी से गायब रहने की शिकायतें इन दिनों विभाग को लगातार मिल रही है। कोरोना वायरस को लेकर सभी स्वास्थ्य संस्थान पहले से ही एलर्ट पर है और सभी डॉक्टरों व स्वास्थ्य कर्मियों की छुट्टियां रद्द किया जा चुका है। इसके बावजूद मेडिकल कॉलेज अस्पताल एवं जिला अस्पताल, अनुमंडलीय अस्पताल एवं प्राथमिक चिकित्सा केंद्र (पीएचसी) से डॉक्टर सहित स्वास्थ्यकर्मियों के डयूटी से अनुपस्थित रह रहे हैं। स्वास्थ्य विभाग ने ऐसे कर्मियों को चिन्हित करना शुरू कर दिया है। 
विभाग के संयुक्त सचिव डॉ. कौशल किशोर के अनुसार वैश्विक महामारी का प्रकोप व्याप्त होने के कारण बिहार में महामारी कानून, 1897 लागू है। ऐसी परिस्थिति में जिन्हें जो दायित्व दिया गया है वे वहां उसे निभाएं। जो कर्मी अनुस्थित चल रहे हैं वे अविलंब कार्यस्थल पर पहुंचें। ऐसा नहीं करने पर कर्मी अनुशासनिक दंड के भागी होंगे। 
सिर्फ अध्ययन अवकाश और मातृत्व अवकाश पर कर्मियों को है छूट 
विभाग से मिली जानकारी के अनुसार सिर्फ अध्ययन अवकाश और मातृत्व अवकाश पर रह रहे कर्मियों को ही डयूटी से छूट प्रदान की गयी है। वहीं, शेष सभी कर्मियों को डयूटी पर हाजिर होना है। स्वास्थ्य विभाग ने इनकर्मियों को कोई रियायत नहीं दी है। 
अधिक उम्र के ह्दय व मधुमेह के मरीज डॉक्टरों की भी डयूटी लगी
दूसरी ओर 60 साल से अधिक आयु के ह्दय रोग व मधुमेह के मरीज डॉक्टरों की भी डयूटी कोरोना से पीड़ितों के जांच व इलाज में लगा दी गयी है। ऐसे ही कुछ डॉक्टरों को हाल ही में दूसरे चिकित्सकीय संस्थानों से नालंदा मेडिकल कॉलेज अस्पताल में तैनात किया गया है। उच्च जोखिम में आने के कारण इन डाक्टरों और कर्मियों में कोरोना वायरस के खतरे को लेकर काफी घबराहट है।
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