चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर ने ट्वीट के जरिये एक वीडियो शेयर की है, इस वीडियो में बिहार के दर्जनों लोग एक गेट के अंदर बंद हैं और खुद को बाहर निकालने की गुहार लगा रहे हैं। अपने ट्वीट में प्रशांत किशोर ने लिखा है कि Corona संक्रमण से लोगों को बचाने के सरकारी प्रयासों की एक और भयावह तस्वीर- भारी तकलीफ़ और मुसीबतों को झेलकर देश के कई हिस्सों से बिहार पहुँचने वाले गरीब लोगों के लिए नीतीश कुमार की SocialDistancing और Quarantine की ये व्यवस्था दिल दहलाने वाली है। 

. संक्रमण से लोगों को बचाने के सरकारी प्रयासों की एक और भयावह तस्वीर -

भारी तकलीफ़ और मुसीबतों को झेलकर देश के कई हिस्सों से बिहार पहुँचने वाले गरीब लोगों के लिए की और की ये व्यवस्था दिल दहलाने वाली है।

5,263 लोग इस बारे में बात कर रहे हैं

बता दें कि बिहार के सीवान जिले के गुठनी थाना क्षेत्र के सरैया स्थित आरबीटी विद्यालय में बने अस्थाई कैंप में बिजली, पानी व दवाईयां नहीं मिलने से भड़के लोगों ने रविवार को जमकर हंगामा किया। इस दौरान लोगों ने कहा कि कोरोना से संक्रमित नहीं होने के बावजूद उन्हें राहत कैंप में रखा गया है। हंगामे की सूचना पर पहुंची स्थानीय प्रशासन ने उन लोगों को पहले तो समझाने का प्रयास किया, उसके बाद हंगामा बढ़ता देख उन लोगों को गेट के अंदर कुछ देर के लिए बंद कर दिया। इस दौरान वहां मौजूद मीडिया के लोगों से हंगामा कर रहे लोगों ने उन्हें वहां से निकालने की गुहार लगाई। मीडिया ने जब इसकी सूचना संबंधित अधिकारियों को दी तो पुलिस कर्मियों ने गेट के ताले को खोल दिया। 
शनिवार की देर रात यूपी के नोएडा, गौतमबुद्ध नगर, गाजियाबाद, लखनऊ, कानपुर, झांसी, बरेली, गोरखपुर, देवरिया के रास्ते श्रीकरपुर चेकपोस्ट पहुंचे 83 लोगों को रोक लिया गया था। इसके बाद स्थानीय प्रशासन ने सभी को अस्थाई कैंप में रख दिया। कैंप में बिहार के सीवान समेत सीतामढ़ी, मधुबनी, छपरा, वैशाली व दरभंगा के लोग हैं। कैंप में रहने वालों ने बताया कि कोरोना ही नहीं बल्कि कोई दूसरी बीमारी भी उन्हें नहीं है। यूपी सरकार ने इसकी जांच रास्ते में कई बार की। लोगों ने बताया कि गाजियाबाद, हापुड़, बरेली, नोएडा, गुरुग्राम, हरियाणा व फरीदाबाद से आ रहे हैं। राहत कैंप में रह रहे लोगों ने बिजली, पानी व आवश्यक दवाईयों की कमी का हवाला देते हुए सरकार से सुरक्षित उनके घर पहुंचाने की मांग की। 
कहा कि इस हालत में तो बिना बीमारी के ही बीमार पड़ जाएंगे। इस बीच राहत कैंप में हंगामा की सूचना पर बीडीओ धीरज कुमार दुबे, सीओ राकेश कुमार व थानाध्यक्ष मनोरंजन कुमार मौके पर पहुंचे। आक्रोशित लोग प्रशासन से अपने घर जाने की मांग करते रहे। हालांकि अधिकारियों का कहना था कि वरीय अधिकारियों से निर्देश मिलने के बाद ही कुछ निर्णय लिया जा सकता है। हंगामा करने वालों में संदेश कुमार, देवेंद्र कुमार,ललन कुमार, मुकेश कुमार, राजेश मांझी, धर्मेन्द्र , मोतीलाल, राजेंद्र शाह, बलवंत व धीरज शामिल थे।
83 मजदूरों का किया गया मेडकिल चेकअप 
देर रात यूपी के रास्ते बिहार के सीवान की सीमा में पहुंचे 83 मजदूरों को देख स्थानीय प्रशासन के हाथ-पांव शनिवार को फूलने लगे। तत्काल सभी मजदूरों को अस्थाई आइसोलेशन वार्ड में भर्ती कराया गया। इनमें से 59 मजदूर को पहले ही कॉन्टिनेंट कर दिया गया है। इनके हाथ पर मुहर लगी है। हुआ है। हालांकि अलग से जांच भी की जा रही है। एमओ शब्बीर अख्तर ने बताया कि पीएचसी के डॉक्टरों की टीम लगातार हेल्थ चेकअप कर रही है।
सभी लोगों की सूची अलग से तैयार हो रही है। तीन टीम नियमित सभी मजदूरों का हेल्थ चेकअप कर उसकी रिपोर्ट तैयार कर रही है। डॉ शब्बीर अख्तर, डॉ संजय कुमार व फार्मासिस्ट अर्रंवद कुमार को तैनात किया गया है।
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