नई दिल्ली: कोरोना वायरस के चलते भारत से लेकर दुनियाभर के देश परेशान हैं। देश में कोरोना वायरस के मामले तेजी से बढ़े हैं, जिसके चलते 3 मई तक पूरी तरह से लॉकडाउन का ऐलान किया गया है। ऐसे में बिहार की नीतीश कुमार सरकार ने राज्य के बाहर रह रहे राज्य के मजदूरों के खाते में एक हजार रुपये डाले हैं। बता दें कि देश में यह अपनी तरह की पहली स्कीम है, जिससे राज्य से बाहर फंसे लोगों को आर्थिक मदद दी जा रही है।
नीतीश सरकार ने कोरोना महामारी के चलते राज्य के बाहर फंसे प्रवासी श्रमिकों की पहचान करने के लिए जियोफेन्सिंग तकनीक का इस्तेमाल किया है। मजदूरों की पहचान कर राज्य सरकार ने कुल 13 लाख पंजीकृत मजदूरों में से 10.11 लाख के आवेदनों पर विचार करते हुए उन्हें एक-एक हजार रुपये की आर्थिक सहायता उपलब्ध करवाई है।
इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, 17 अप्रैल के उपलब्ध आंकड़ों के हिसाब से बिहार के सबसे ज्यादा प्रवासी मजदूर तीन राज्यों में फंसे हुए हैं। इनमें दिल्ली सबसे आगे है। उसके बाद हरियाणा और महाराष्ट्र है। इन तीनों राज्यों में बिहार सरकार ने कुल कैश ट्रांसफर का 44.5 फीसदी रकम भेजा है।
17 अप्रैल के आंकड़ों के मुताबिक दिल्ली में 1.99 लाख प्रवासी मजदूरों को एक-एक हजार रुपये ट्रांसफर किए जा चुके थे। हरियाणा में 1.39 लाख मजदूरों और महाराष्ट्र में 1.12 लाख मजदूरों को कैश ट्रांसफर किए गए। इनके अलावा गुजरात में 93,219, यूपी में 81,967, पंजाब में फंसे 58,417 और कर्नाटक में फंसे 48, 329 मजदूरों को रकम उनके खातों में ट्रांसफर की गई है।
बता दें कि बिहार में कोरोना वायरस से संक्रमित लोगों की संख्या बढ़कर 86 हो गयी है। वहीं राज्य में अभी तक दो लोगों की मौत कोविड-19 के कारण हुई है।
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