नई दिल्ली. प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (PMFBY-Pradhan Mantri Fasal Bima Yojana) के तहत केंद्र सरकार ने ‘लॉकडाउन’ अवधि के दौरान 12 राज्यों में किसानों के 2,424 करोड़ रुपये के फसल बीमा दावों का निपटारा किया है. केंद्रीय कृषि मंत्रालय ने कहा कि ‘लॉकडाउन’ की अवधि के दौरान उसने किसानों और खेती की गतिविधियों को सुविधाजनक बनाने के लिए कई अन्य उपाय किए हैं. आपको बता दें कि प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना अप्रैल, 2016 में शुरू की गई थी. इसमें ऐसे प्राकृतिक जोखिम जिन्हें रोका नहीं जा सकता है, से बचाव को बुवाई से पहले से लेकर कटाई के बाद तक की अवधि के लिए सब कुछ कवर करने वाला फसल बीमा उपलब्ध कराया जाता है. इसमें खरीफ फसल के लिए निचली 2 फीसदी की प्रीमियम दर लगती है. वहीं रबी फसल के लिए यह दर 1.5 फीसदी और कमर्शियल फसलों के लिए यह 5 फीसदी है.
किसानों को दिया 17800 करोड़ रुपये का कर्ज़
कषि मंत्रालय द्वारा किसान क्रेडिट कार्ड (केसीसी) संतृप्ति अभियान की शुरुआत सभी पीएम-किसान लाभार्थियों को कवर करने के लिए वित्तीय सेवा विभाग के सहयोग से की गई है.
एक बयान में कहा गया, अब तक 83 लाख आवेदन प्राप्त हुए हैं, जिनमें से 18.26 लाख आवेदन 17,800 करोड़ रुपये की कर्ज राशि के लिए स्वीकृत किए गए हैं.
कृषि-स्वर्ण ऋण और अन्य कृषि खातों का केसीसी खाते में रूपांतरण की नियत तारीख 31 मार्च थी लेकिन अब इसे 31 मई तक बढ़ा दिया गया है.
नियम हुआ आसान- मोदी कैबिनेट ने 19 फरवरी 2020 को PM-फसल बीमा योजना में बड़ा बदलाव करते हुए किसानों के लिए इसे स्वैच्छिक कर दिया था. जबकि पहले किसान क्रेडिट कार्ड लेने वाले करीब सात करोड़ किसानों को मजबूरन इसका हिस्सा बनना पड़ता था. कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर का तो मानना है कि स्वैच्छिक आधार पर स्वीकार्यता बढ़ी है.
फसल बीमा का प्रीमियम-प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत खरीफ फसलों पर 2 फीसदी, रबी फसलों पर 1.5 फीसदी और बागवानी नकदी फसलों पर अधिकतम 5 फीसदी प्रीमियम लगता है. बाकी का 98 फीसदी प्रीमियम केंद्र और राज्य सरकारें मिलकर देती हैं. यानी किसानों को सब्सिडी मिलती है.
सब्सिडी में केंद्र सरकार का हिस्सा पूर्वोत्तर के लिए बढ़ाया गया है. इसे 50 प्रतिशत से बढ़ाकर 90 प्रतिशत किया जाएगा. बाकी का 10 फीसदी राज्य सरकार देगी. इसका मतलब है कि प्रीमियम यानी फसल के बीमा के लिए दी जाने वाली रकम में केंद्र सरकार 100 में से 90 रुपये देगी.
शेष राज्यों में केंद्रीय सहायता की दर असिंचित क्षेत्रों (पानी की कमी वाले इलाकों) में 30 प्रतिशत तक सीमित होगी. यानी ऐसी जगहों पर केंद्र सरकार 100 रुपये में से 30 रुपये देगी. बाकी पैसा राज्य सरकार देगी. पहले ये 50 प्रतिशत था. मतलब साफ है कि केंद्र सरकार ने अपनी हिस्सेदारी घटा दी है. जबकि सिंचित क्षेत्रों के लिए यह सहायता घटाकर 25 प्रतिशत तक सीमित रखी गई है. यानी 100 में से 25 रुपये.

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