पटना. बिहार में मंगलवार को 13 नए कोरोना मरीज मिले हैं। इससे प्रदेश में कुल कोरोना पॉजिटिव की संख्या बढ़कर 126 हो गई है। नए मरीजों में बक्सर के 4, पटना के एक, मुंगेर के 7 और रोहतास के एक मरीज शामिल हैं। बक्सर, पटना और मुंगेर के ये लोग मरीज के संपर्क में आने से संक्रमित हुए हैं। जबकि रोहतास के मरीज के कॉन्टेक्ट डिटेल्स की तलाश की जा रही है। पटना मिला नया मरीज 31 साल का युवक है। वह खाजपुरा की पाॅजिटिव महिला से संक्रमित हुअा है। युवक महिला के पति की कंपनी में काम करता है। घर भी महिला के घर के करीब ही है। मुंगेर में कुल मरीजों की संख्या 27, बक्सर में 8 और पटना में 9 हो गई है। मुंगेर एक बार फिर हॉटस्पॉट बन गया है। 
इधर, दैनिक भास्कर के विश्लेषण में यह खतरनाक तथ्य सामने अाया कि प्रदेश में मिलने वाले काेराेना के 75 फीसदी मरीजाें में काेई लक्षण ही नहीं था। राज्य में मंगलवार तक कुल 126 कोरोना पॉजिटिव मरीज हैं। इसमें से 94 में कोरोना के कोई लक्षण नहीं थे। ऐसे मरीजों की औसत आयु 35 साल के करीब है। आईसीएमआर के विशेषज्ञाें का कहना है कि बिना लक्षण वाले मरीज खुद भी समझ नहीं पाते कि वह बीमार हैं। ऐसे मरीजों से कोरोना ज्यादा फैल सकता है। क्योंकि अगर ऐसे मरीज की रोग प्रतिरोधक क्षमता अच्छी है तो ये भी संभव है कि वह बिना इलाज ठीक हो जाए, लेकिन अपने परिजनों और संपर्क के कम रोग प्रतिरोधक क्षमता वाले लोगों को गंभीर रूप से बीमार कर दे। ऐसे में जिम्मेदारी और बढ़ जाती है कि एक तो हम घर में रहे, दूसरे अगर हम भीड़ या अस्पताल जाते हैं और हमें जरा भी शक हो कि हम किसी ऐसे व्यक्ति के संपर्क में आए हैं, जो पॉजिटिव हो सकता है...तो तुरंत अपनी जांच कराएं। इस बाबत स्वास्थ्य विभाग के प्रधान सचिव संजय कुमार ने भी माना कि एेसे मरीज का पता लगाना काफी मुश्किल है। ये एक तरह से कोरोना संक्रमण के वाहक हैं और जहां जाते हैं लोगों को संक्रमित करते रहते हैं।
कोराेना की आग में पीएमसीएच में ये लपटें
हर तरफ कोरोना के डर के बीच पीएमसीएच की सेंट्रल इमरजेंसी की चाैथी मंजिल पर मंगलवार दोपहर करीब दो बजे लपटें उठने लगीं। नर्स और पैरामेडिकल स्टाफ ने 60 से अधिक मरीजों को अस्पताल से बाहर निकाला। कई मरीज परिजनों की मदद से भी बाहर आए। प्रशासन ने आग की वजह शॉर्ट सर्किट बताया, हालांकि जांच के लिए कमेटी का भी गठन कर दिया है।
ये छुपा संक्रमण हमारे लिए घातक 26 दिनों में मिले 80 कोरोना मरीजों में 63 बिना लक्षण के
सांस में परेशानी या बुखार तो दूर, सर्दी-खांसी भी नहीं। बिहार में कोरोना पॉजिटिव पाए गए 75 फीसदी मरीज ऐसे ही निकले हैं। भास्कर ने बिहार में 22 मार्च से 16 अप्रैल तक पॉजिटिव पाए गए 80 मरीजों के रिकॉर्ड की पड़ताल की तो सामने आया कि इनमें से 63 बगैर लक्षण वाले, यानी एसिम्प्टोमेटिक थे। कोरोना के इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती किए जाते समय भी उन्हें भरोसा नहीं था कि वह संक्रमण के शिकार हैं। 
26 दिनों की जांच में पाॅजिटिव पाए गए 17 मरीजों में ही काेराेना के लक्षण मिले थे। इनमें मुंगेर का माे. सैफ अाैर वैशाली का नवल किशाेर राय भी शामिल है, जिनकी एम्स में माैत हुई थी। मुंगेर के मो. सैफ के चेन में जाे 13 लाेग पाॅजिटिव हुए थे, उनमें से एक में ही काेराेना का लक्षण दिखा था। अन्य 12 मरीजों में इस बीमारी का काेई लक्षण नहीं था। सीवान के जिस युवक ने वायरस चेन लंबा किया था, उसमें काेराेना का लक्षण एडमिट हाेने के वक्त तक नहीं था, लेकिन उसकी मां, पत्नी व भाई लक्षणों के साथ बीमार थे। यानी, जिसने बीमारी फैलाई उसमें लक्षण बाद में आया। आईसीएमआर के चीफ इपिडेमोलॉजिस्ट रमण आर गंगाखेडकर ने बताया कि भारत में अबतक 69 प्रतिशत ऐसे केस निकले हैं। इसलिए, सामाजिक दूरी का पालन जरूरी है।  
3 तरह के पॉजिटिव
  • 80% केस में न्यूनतम लक्षण दिखते हैं, इलाज के दौरान भी माइल्ड या वेरी माइल्ड लक्षण विकसित होते हैं
  • 15% केस में ऐसे पॉजिटिव मरीज 4 से 14 दिनों के अंदर सीवियर होते हैं, इन्हें पूरा ट्रीटमेंट देना पड़ता है।
  • 05% केस में ऐसे पॉजिटिव मरीज क्रिटिकल हो जाते हैं और इन्हें वेटीलेटर पर रखने की जरूरत पड़ती है।
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