रेलवे 14 अप्रैल को लॉकडाउन खत्म होने के बाद संभावित ट्रेन परिचालन को लेकर तैयारियों में जुट गया है। कोरोना वायरस संक्रमण से निपटने को लेकर कुछ प्रस्तावों पर विचार कर रहा है। इसके तहत यदि परिचालन शुरू किया जाता है तो यात्रियों को मास्क पहनने के निर्देश देने समेत उनके स्वास्थ्य की जांच करने और यात्रियों के बीच दूरी रखने जैसे कदम उठाए जा सकते हैं।
लॉकडाउन के मद्देनजर स्थगित की गई यात्री सेवाएं कब बहाल होंगी, इस बारे में अभी तक कोई फैसला नहीं लिया गया है लेकिन अधिकारियों ने कहा है कि सरकार से हरी झंडी मिलने के बाद इसे चरणबद्ध तरीके से बहाल किया जा सकता है। अधिकारियों ने बताया कि ट्रेन सेवाएं बहाल करने के बारे में फैसला आगामी हफ्ते में लिए जाने की संभावना है।
एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, 'यह संवेदनशील समय है और हम फिलहाल राजस्व अर्जित करने के बारे में नहीं सोच रहे हैं। मुख्य जोर यात्री सुरक्षा पर और (कोरोना वायरस) महामारी के नहीं फैलने पर है। सरकार जब हरी झंडी दिखा देगी तब समय आने पर ट्रेनें चलेंगी। हालांकि अभी तक हमने कोई फैसला नहीं लिया है। रेलवे के विभिन्न जोनों में अधिकारी उन ट्रेनों और मार्गों को चिह्नित कर रहे हैं जिन्हें बोर्ड की मंजूरी के साथ बहाल किया जा सकता है। अधिकारियों ने कहा कि मुख्य तौर पर ध्यान इस पर देना है कि क्या प्रवासी कामगारों को ले जाने वाले मार्गों और जो लोग यात्रा नहीं कर रहे हैं तथा कोविड-19 के अत्यधिक संक्रमण वाले स्थानों पर रुके हुए हैं, को शुरू में बहाल किया जा सकता है।
उन्होंने कहा कि रेलवे को यह भी ध्यान में रखना होगा कि लॉकडाउन कैसे खुलने वाला है। यदि यह चुनिंदा तरीके से होता है तो फिर ट्रेनें सिर्फ उन्हीं इलाकों में परिचालित होंगी जहां लॉकडाउन (उस वक्त) हट गया होगा। रेलवे द्वारा 19 मार्च के उस आदेश को भी जल्दबाजी में रद्द नहीं करने की संभावना है, जिसके तहत यह कहा गया था कि अनावश्यक यात्रा को हतोत्साहित करने के लिए लॉकडाउन के बाद की भी अवधि में रोगियों, छात्रों और दिव्यांगों को छोड़ कर अन्य यात्रियों के लिए किराये में रियायत स्थगित की जा रही है। अधिकारियों ने बताया कि ट्रेन सेवाएं बहाल होने के बाद यात्रियों की सुरक्षा के लिए जरूरी प्रोटोकॉल पर भी रेलवे चर्चा कर रहा है। वे ट्रेनों में सवार होने वाले यात्रियों की थर्मल स्क्रीनिंग और अन्य तरीकों से जांच करने पर भी विचार कर रहे हैं।
रेलवे के व्यक्तिगत सुरक्षा उपकरण को डीआरडीओ की हरी झंडी
उत्तर रेलवे के वर्कशॉप में बने व्यक्तिगत सुरक्षा उपकरण (पीपीई) के दो नमूनों को रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) ने हरी झंडी दे दी है। इससे रेलवे इकाइयों में इनके उत्पादन का मार्ग प्रशस्त हो गया है। ये उपकरण रक्त या शरीर से निकलने वाले तरल पदार्थ को रोक पाने में कारगर साबित हुए हैं।
उत्तर रेलवे ने रविवार को कहा-अब इन पीपीई का विनिर्माण भारतीय रेल द्वारा किया जाएगा, इसे रेलवे अस्पतालों में कोविड रोगियों का इलाज करने वाले चिकित्सक इस्तेमाल करेंगे। उल्लेखनीय है कि देश में कोरोना वायरस संक्रमित मरीजों का इलाज कर रहे चिकित्साकर्मियों के लिए पीपीई की काफी कमी है। उत्तर रेलवे के प्रवक्ता दीपक कुमार ने बताया कि अभी रेलवे प्रतिदिन 20 पीपीई बना पा रहा है, लेकिन आने वाले हफ्तों में प्रतिदिन 100 बनाने में सक्षम होगा।
13 लाख रेल कर्मियों को आरोग्य सेतु एप डाउनलोड करने को कहा

भारतीय रेलवे ने अपने 13 लाख कर्मचारियों और उनके परिवारों को स्वास्थ्य मंत्रालय के एप आरोग्य सेतु को डाउनलोड करने के लिए कहा है। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने दो अप्रैल को यह एप शुरू किया था। इस मोबाइल एप से लोगों को यह पता लगाने में मदद मिलती है कि उन्हें कोरोना वायरस से संक्रमण का खतरा है या नहीं।
इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के तहत आने वाले नेशनल इंफोर्मेटिक्स सेंटर ने विकसित किया है। रेलवे ने कहा कि यह एप भारत में कोरोना वायरस संकट से निपटने में काफी महत्वपूर्ण साबित हो सकता है। शुरू किए जाने के बाद सिर्फ तीन दिनों में ही आरोग्य सेतु एप को गूगल प्ले स्टोर से 50 लाख से अधिक लोगों ने डाउनलोड किया है। यह एप 11 भाषाओं में उपलब्ध है।

Share To:

Post A Comment: