पटना. इसी 28 मार्च को ‘दिल्ली प्लान’, और इससे मचे कोहराम ने बिहार के संदर्भ में एकबारगी यह डरावना सवाल खड़ा कर दिया कि अब क्या होगा? दिल्ली से, बिहार के लिए बड़ी चालाकी से खदेड़ दिया गया बिहारियों का हुजूम, कोरोना से लड़ती बिहार सरकार और उसके इंतजामों के लिए, अचानक आई बिल्कुल नई भयावह चुनौती रही। सरकार ने तुरंत इस मोर्चे पर फतह के उपाय किए और लगातार कामयाब हो रही है। लॉकडाउन के बीच दूसरे राज्यों से यहां 1.80 लाख लोग आए। उनको रेगुलेट करके उनके गांव-घर के बिल्कुल पास वाले क्वारेंटाइन सेंटर में 14 दिनों के लिए रखा गया है, रखा जा रहा है।
पहले सीमा पर जांच फिर गांव के क्वारेंटाइन सेंटर में भेजा, जहां खाने-पीने का पूरा इंतजाम
राज्य सरकार ने इंतजामों को गांवों तक पहुंचाया है। जरूरी था। इसका जिम्मा पंचायती राज संस्थानों को है। बाहर से आए लोगों को पहले सीमावर्ती जिलों के आपदा केंद्रों पर रखा गया। उनकी प्रारंभिक जांच कर उन्हें उनके गांव के पास वाले क्वारेंटाइन सेंटर में पहुंचाया गया है। मंगलवार (31 मार्च) को ऐसे 10 हजार और लोग इन सेंटरों में भेजे गए। सोमवार को 13 हजार और रविवार को करीब 25 हजार लोग यहां भेजे गए। यहां उनके रहने, खाने से लेकर इलाज तक का प्रबंध है। 14 दिन तक उनकी निगरानी होगी। जांच होगी। कोरोना पॉजिटिव मिलने पर उनको आइसोलेशन वार्ड में भेजा जाएगा। उन पर लगातार निगरानी रहेगी।
इन सारे काम में प्रखंड के बीडीओ, मुखिया, सरपंच, पंच, एएनएम, आंगनबाड़ी सेविका, हेल्थ केयर वर्कर आदि लगे हैं। संदिग्ध मरीजों को सर्विलांस पर रखा जा रहा है। शहरों में 120 राहत केंद्र चल रहे हैं। मंगलवार को यहां करीब साढ़े सात हजार लोगों को भोजन कराया गया। इससे भी ज्यादा बड़ा मोर्चा, दूसरे राज्यों में फंसे बिहारियों के रहने, खाने व इलाज के प्रबंध का है। इनकी संख्या का अंदाज इसी से किया जा सकता है कि मंगलवार तक (31 मार्च) सिर्फ राज्य सरकार के दिल्ली कंट्रोल रूम से ऐसे 2.85 लाख बिहारियों की सहायता की गई। ऐसे और बहुत सारे लोग जहां-तहां हैं। ऐसे लोगों की समस्याओं को जानने, उसका निराकरण करने में मुख्यमंत्री आवास के टेलीफोन से लेकर आपदा प्रबंधन विभाग जैसे जनता से सीधे सरोकार रखने वाले विभागों के अलग-अलग हेल्पलाइन नंबर हैं। मुख्यमंत्री ने बिहार फाउंडेशन को भी राहत, सहायता का जिम्मा दिया है। 
मुफ्त अनाज, राशि अाैर पेंशन भी
मुख्यमंत्री नीतीश कुमार अक्सर कहते रहे हैं कि खजाने पर पहला हक आपदा पीड़ितों का होता है। बात सिर्फ रोकथाम व इलाज के उपाय भर की नहीं है। सरकार ने यह मानते हुए कि विपदा का यह मौका सबसे ज्यादा गरीबों, बेसहारों को तबाह करेगा, उनकी खातिर मुफ्त राशन, नकदी, अग्रिम पेंशन आदि का इंतजाम किया। एक बड़ा टास्क जमाखोरी, कालाबाजारी को रोकने और लॉकडाउन को सौ फीसदी कामयाब बनाने का रहा। शुरू में बाजार में हड़कंप सा था। सब्जियों के दाम बहुत उछाल पर। यह सबकुछ धीरे-धीरे सामान्य सा हुआ है। अभी, सभी दूसरे राज्य, ज्यादातर मायनों में अपने में ही उलझे हैं, सो बिहार को बहुत कुछ अपने बूते करना पड़ रहा है।
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