सार गृह मंत्रालय का कहना था कि केवल जरूरी वस्तुओं के लिए यह छूट प्रदान की गई है। लॉकडाउन में कितने वाहन चलेंगे, इस पर भी अनेक राज्य अलग राह पर चलते हुए दिखे। मेडिकल कर्मियों की सुरक्षा और क्वॉरंटीन केंद्र का सुरक्षा चक्र टूटने की शिकायतें आने लगीं।
विस्तार
देश में 15 अप्रैल से लागू लॉकडाउन-2 में मिली छूट को बहुत से राज्य अपनी मनमर्जी से लागू करने की बात कर रहे हैं। केंद्र और राज्यों के बीच मतभेद उभर कर सामने आ रहे हैं। महाराष्ट्र, उड़ीसा व राजस्थान आदि राज्यों ने ई-कॉमर्स कंपनियों को जरूरी और गैर-जरूरी वस्तुओं का कारोबार करने की इजाजत दे दी। गृह मंत्रालय का कहना था कि केवल जरूरी वस्तुओं के लिए यह छूट प्रदान की गई है।
लॉकडाउन में कितने वाहन चलेंगे, इस पर भी अनेक राज्य अलग राह पर चलते हुए दिखे। मेडिकलकर्मियों की सुरक्षा और क्वॉरंटीन केंद्र का सुरक्षा चक्र टूटने की शिकायतें आने लगी।

नतीजन, रविवार शाम को केंद्रीय मंत्री अमित शाह को बीच में हस्तक्षेप करना पड़ा। उन्होंने कहा, जो इलाके हॉट-स्पॉट/क्लस्टर्स या कंटेनमेंट जोन में नहीं आते और वहां कुछ गतिविधियां शुरू करने की अनुमति दी जा रही है, वहां सावधानी बरतना बेहद जरूरी है।

राज्य के लिए यह सुनिश्चित करना जरूरी है कि छूट केवल वास्तविक परिस्थितियों का यथोचित आंकलन करके ही प्रदान की जाए। अमित शाह ने पीएम मोदी का नाम लेकर यह भी कहा कि देश उनके नेतृत्व में कोरोना से लड़ाई लड़ रहा है।
केंद्रीय गृह मंत्रालय के सूत्रों के अनुसार, पिछले एक सप्ताह में कई बार एडवायजरी को संशोधित किया गया है। मंत्रालय ने जिन नियमों के पालन की बात कही थी, अनेक राज्यों में उसका पालन होता दिखाई नहीं दिया।

राजस्थान, उड़ीसा, महाराष्ट्र, पंजाब, तेलंगाना व बिहार सहित कई राज्यों ने लॉकडाउन में अपने ही नियम बना डाले। लॉकडाउन के दौरान ई-कॉमर्स कंपनियों के कितने वाहन और कहां चलेंगे, इस बाबत भी केंद्र और राज्यों के बीच तालमेल नहीं बनता दिखा।

इसके बाद मंत्रालय ने सभी राज्यों से कहा कि वे लॉकडाउन के नियमों को ध्यान में रखकर ई-कॉमर्स कंपनियों के वाहनों को चलने की छूट प्रदान करें। पहले यही नहीं समझ आया कि कंपनियों या छूट प्राप्त दूसरे संगठनों के वाहनों को इजाजत कौन देगा।

इसके लिए राज्यों ने केंद्र से आग्रह किया कि वह इस बाबत दिशा निर्देश दे। गृह मंत्रालय ने कहा, एडवायजरी के मुताबिक, राज्य अपने स्तर पर ऐसे वाहनों के लिए पास जारी कर सकता है।

इसके बाद कुछ राज्यों से यह खबर आई कि ई-कॉमर्स कंपनियों के वाहन 24 घंटे चल सकते हैं। इन सबके बीच रविवार को केंद्र ने यह भी कह दिया कि ई-कॉमर्स कंपनियां केवल जरूरी वस्तुओं का कारोबार करेंगी।
राज्य के भीतर ही मजदूरों को कार्यस्थल पर पहुंचाने की व्यवस्था करें
अमित शाह ने 19 अप्रैल को कोरोना महामारी पर अपने अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक कर राज्यों को कुछ जरूरी निर्देश दिए। उन्होंने कहा, छूट के दौरान कोरोना की लड़ाई के महत्वपूर्ण बिंदुओं को ध्यान में रखकर स्थिति को नियंत्रण में रखा जाए।

प्रधानमंत्री, नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत कोरोना के साथ लड़ाई लड़ रहा है। सभी राज्यों को लॉकडाउन प्रतिबंधों का पालन करने के अलावा समय-समय पर केंद्र सरकार के दिए गए दिशा-निर्देशों का भी निष्ठापूर्वक पालन करना होगा।

ग्रामीण अर्थव्यवस्था को बल देने के लिए कुछ आर्थिक गतिविधियां शुरू करने की अनुमति दी गई है। इसके लिए जिला अधिकारियों को उद्योग-समूहों के सहयोग से, राज्य के भीतर ही मजदूरों को उनके कार्यस्थल पर पहुंचाने की व्यवस्था करनी चाहिए।

बता दें कि कुछ राज्यों ने दूसरे प्रदेशों में मजदूरी कार्यों के लिए गए अपने लोगों को वापस लाने की कवायद शुरू करने की बात कही जा रही है। अमित शाह ने यह बात उन्हीं राज्यों के संदर्भ में कही है कि वे लोकल स्तर पर जो मजदूर हैं, उन्हीं की मदद से काम शुरू कराएं।
बड़े औद्योगिक परिसरों के संचालन पर विशेष ध्यान दिया जाए
गृहमंत्री शाह ने कहा, विशेषकर ऐसी इकाइयों के संचालन पर राज्य खास ध्यान दें, जहां मजदूरों को परिसर में ही रखने की व्यवस्था हो। इससे आर्थिक गतिविधियां तेज होंगी। साथ ही मज़दूरों को रोजगार प्रदान करने में मदद मिलेगी।

इस विषम परिस्थिति में मोदी सरकार देश के सभी वर्गों के हितों की रक्षा के लिए कटिबद्ध है। उद्योगों के साथ कृषि तथा मनरेगा गतिविधियों के माध्यम से भी मजदूरों को रोजगार देने की संभावनाओं पर कार्य करना होगा।

वे मजदूर, जो राहत शिविरों में रह रहे हैं, उनके लिए उपलब्ध सुविधाओं, जैसे भोजन की गुणवत्ता आदि पर अधिक ध्यान दिया जाना चाहिए। यद्यपि ये स्थितियां चुनौतीपूर्ण हैं, लेकिन इस प्रकार के मुद्दों का हल निकाला जा सकता है।
मेडिकल टीमों की सुरक्षा करनी होगी: अमित शाह
गृहमंत्री ने कहा कि राज्यों के लिए यह भी सुनिश्चित करना जरूरी है कि वे मेडिकल टीमों को पूर्ण सुरक्षा प्रदान करें। इस बाबत मंत्रालय ने कई बार एडवायजरी दी है कि मेडिकल टीमों की सुरक्षा की जाए, लेकिन इसके बावजूद कई राज्यों में मेडिकल स्टाफ पर हमले हो रहे हैं।

कोरोना को लेकर सामुदायिक परीक्षण के लिए निकली मेडिकल टीमों की सुरक्षा के लिए अगर अतिरिक्त बल तैनात करना पड़ता है, तो वह किया जाए। इस तरह के सामुदायिक परीक्षण के दौरान समुदाय के जिम्मेदार नेताओं को साथ लेना बेहतर होगा।

शांति समितियों की मदद भी ली जा सकती है। उन्होंने यह भी सुनिश्चित करने का निर्देश दिया कि दिशा-निर्देशों के अनुपालन की निगरानी के लिए ग्रामीण क्षेत्रों में पर्याप्त गश्त की जानी चाहिए।
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