नई दिल्‍ली. जम्‍मू और कश्‍मीर (Jammu Kashmir) की खूबसूरत वादियों में रहने वाले 36 वर्षीय आरिफ मोहम्‍मद (Arif Mohammad) ने रोजगार की तलाश में मुंबई (Mumbai) का रुख कर लिया था. बीते कुछ महीनों से वह मुंबई की एक इमारत में चौकीदार का काम कर रहे थे. 1 अप्रैल को अपने एक रिश्‍तेदार के जरिए आरिफ को पता चलता है कि राजौरी में रहने वाले उनके पिता को स्‍ट्रोक आया है और हालत नाजुक है. यह बात पता चलते ही आरिफ अपने बीमार पिता से मिलने के लिए बेचैन हो गए. चूंकि लॉकडाउन (Lockdown) के चलते सभी पब्लिक ट्रांसपोर्ट बंद थे, लिहाजा आरिफ ने साइकिल से ही 2200 किमी का सफर पूरा करने की ठान ली. अगले दिन, यानी 2 अप्रैल को वह साइकिल पर सवार होकर मुंबई से राजौरी (जम्‍मू और कश्‍मीर) के लिए निकल पड़े.
CRPF ने आरिफ के पिता को हेलीकॉप्‍टर से पहुंचाया अस्‍पताल
उधर, आरिफ के पिता वाजिर हुसैन को उनके कुछ रिश्‍तेदारों ने जिला अस्‍पताल तक पहुंचाया. लेकिन, वहां इलाज के पर्याप्‍त साधन न होने चलते उन्‍हें वापस घर भेज दिया गया. जिसके बाद, हुसैन के रिश्‍तेदारों ने सीआरपीएफ की हेल्‍पलाइन ‘मददगार’ से फोन पर संपर्क किया. मेडिकल इमरजेंसी की सूचना मिलते ही सीआरपीएफ की 51वीं बटालियन के अधिकारी सक्रिय हो गए. उन्‍होंने तय किया कि किसी भी सूरत में वाजिर हुसैन तक मेडिकल हेल्‍प पहुंचानी है. इस फैसले के तहत, आरिफ के पिता वाजिर हुसैन को हेलीकॉप्‍टर के जरिए राजौरी से जम्‍मू भेजा गया. जम्‍मू से सड़क मार्ग के जरिए उन्‍हें चंडीगढ़ लाया गया. सीआरपीएफ की मदद से अब आरिफ के पिता को चंडीगढ़ में बेहतर इलाज मिलना शुरू हो चुका था.
तीन दिन तक लगातार साइकिल चला वडोदरा पहुंचे आरिफ
वहीं, मुंबई से साइकिल पर सवार होकर राजौरी के लिए निकले आरिफ तीन दिन तक लगातार साइकिल चलाकर वडोदरा तक पहुंच गए थे. जहां, लॉक डाउन के चलते वडोदरा की सीमा पर तैनात सीआरपीएफ की टुकड़ी ने आरिफ को पकड़ लिया. आरिफ की पूरी आपबीती सुनने के बाद सीआरपीएफ के जवानों ने उन्हें शेल्‍टर दिया. इसी बीच, आरिफ को वायरल हुए एक वीडियो के जरिए पता चलता है कि उनके पिता को सीआरपीएफ की कश्‍मीर यूनिट ने चंडीगढ़ के अस्‍पताल में भर्ती कराया है. वह तत्‍काल यह वीडियो लेकर वडोदरा के सीआरपीएफ अधिकारी के पास पहुंचते हैं और उन्हें वहां से जाने देने की इजाजत मांगते  हैं. पहले सीआरपीएफ के अधिकारी उन्हें जाने से रोकते हैं, लेकिन उनकी परेशानी देखकर फैसला करते हैं कि वे अपनी जिम्‍मेदारी पर आरिफ को चंडीगढ़ तक पहुंचाएंगे.
CRPF की मदद से बीमार पिता तक पहुंचने में कामयाब रहे आरिफ
फैसले के तहत, सीआरपीएफ के अधिकारियों ने वडोदरा से चंडीगढ़ के बीच पड़ने वाली सभी यूनिट के अधिकारियों से संपर्क कर उनसे मदद मांगी. सभी जगह से सकारात्‍मक जवाब मिलने के बाद, आरिफ को सीआरपीएफ की गाड़ी से अहमदाबाद भेजा गया. अहमदाबाद की सीआरपीएफ यूनिट ने आरिफ को लुधियाना और लुधियाना की यूनिट ने उन्हें चंडीगढ़ तक पहुंचाया. सीआरपीएफ के अधिकारियों की कोशिश का ही नतीजा है कि न सिर्फ आरिफ अपने पिता से मिल पाए, बल्कि उनके पिता को बेहतर इलाज मिल सका.

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