मुम्बई में रह रहे बिहार-यूपी के गरीब लोगों का दर्द कैमरा सामने आते ही छलक पड़ा। टीवी चैनल NDTV से बात करने के दौरान इन लोगों ने आरोप लगाया कि राज्य और केंद्र सरकार जितना दावा कर रही है उतना धरातल पर सुविधाएं नहीं दी जा रही है। हमलोगों को 24 घंटे में मात्र एक बार भोजन दिया जा रहा है। ना तो नाश्ता मिलता है और ना रात का खाना।
बीस-पच्चीस साल वाले युवक तो किसी तरह एक लंच पैकेट से अपना जुगार कर लेते हैं। मगर जिनके घर में छोटे-छोटे बच्चे हैं उनको अधिक परेशानियों का सामना करना पड़ता है। इन गरीब लोगों की माने तो मीडिया के माध्यम से अपनी बातों को रखने के लिए हम लोग एक संग होकर मुम्बई के बांद्रा स्टेशन पर जमा हुए। जब हमें यह आश्वासन दिया गया कि हमारा ख्याल रखा जाएगा तब हम अपने-अपने घर लौट गए।
मुंबई में हजारों कामगार उतरे सड़क पर : मुंंबई के बांद्रा रेलवे स्टेशन पर मंगलवार को हजारों लोगों ने जमा होकर कोरोना वायरस के प्रसार पर नियंत्रण के लिए जारी लॉकडाउन को तार-तार कर दिया। इसमें अधिकतर प्रवासी मजदूर थे। यह भीड़ रेल सेवा शुरू होने की अफवाह से एकत्र हुई थी ।
राज्य ब्यूरो, मुंबई : तीन मई तक लॉकडाउन बढ़ाए जाने की घोषणा के बाद मंगलवार को प्रवासी कामगार मुंबई के बांद्रा रेलवे स्टेशन और ठाणो के मुंब्रा इलाके में बड़ी संख्या में सड़कों पर उतरकर गृहराज्य भेजे जाने की जिद करने लगे। पुलिस ने करीब एक हजार प्रवासी कामगारों के खिलाफ एफआइआर दर्ज कर ली है, लेकिन किसी को गिरफ्तार नहीं किया गया है। खुद गृह मंत्री अमित शाह ने महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे को फोन करके घटना पर चिंता जताई।
मुंबई में लोग मंगलवार को ट्रेनें चलने की गलत सूचनाओं पर भरोसा करते हुए स्टेशनों तक पहुंचने की कोशिश करने लगे। बांद्रा में जमा करीब 3,000 लोगों की भीड़ को वापस उनके घरों तक भेजने के लिए पुलिस को हल्का बल प्रयोग करना पड़ा। मंगलवार को बांद्रा में आए कुछ सौ लोगों को सरकार की तरफ से राशन देना शुरू किया गया तो राशन लेने के लिए भीड़ और बढ़ने लगी। पुलिस के समझाने पर भी लोग वापस जाने को तैयार नहीं हो रहे थे।

चूंकि इकट्ठा हुए लोगों में ज्यादा संख्या एक विशेष समुदाय के लोगों की थी इसलिए पास ही स्थित एक मस्जिद के धर्मगुरु से भी लोगों को समझाने को कहा गया। धर्मगुरुओं के संबोधन के बाद भी जब लोग लौटने को तैयार नहीं हुए तो पुलिस को हल्का बल प्रयोग करना पड़ा। मुंबई की सघन झोपड़पट्टियों में कोविड-19 के मामले सामने आने के बाद प्रवासियों में उत्तर प्रदेश, बिहार, बंगाल, तमिलनाडु और दूसरे राज्यों में अपने घरों को लौटने की बेचैनी बढ़ी है।

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