लखनऊ। कोरोना वायरस के खिलाफ जंग में प्रदेश सरकार ने अब धर्मगुरुओं का भी सहयोग लिया है। इस कड़ी में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने रविवार शाम 377 धर्मगुरुओं के साथ वीडियो काॅन्फ्रेंसिंग के माध्यम से चर्चा की। इसमें प्रत्येक जनपद से लगभग चार-पांच धर्म गुरु शामिल थे। इस दौरान धर्मगुरुओं से आम जनता को लॉकडाउन का पूरी तरह से पालन करने के लिए जागरूक करने और लॉकडाउन खोले जाने के बाद भी सतर्कता बरतने को कहा गया।
मुख्यमंत्री ने धर्मगुरुओं को कोरोना वायरस के मद्देनजर प्रदेश की मौजूदा स्थिति से अवगत कराते हुए सहयोग मांगा। उन्होंने कहा कि वर्तमान में पूरी दुनिया कोरोना से प्रभावित है। इसके कारण दुनिया की व्यवस्था अस्त व्यस्त पड़ी है।
बड़ी ताकतों की बात करें तो अमेरिका में बड़ी संख्या में मौते हुई हैं। इटेल में 15000 और स्पेन 12000 मौते हो चुकी हैं। ईरान सहित दुनिया के तमाम देश इसका शिकार हुए हैं। विश्व में 66000 से अधिक मौतें इस वायरस के कारण हो चुकी हैं, लेकिन भारत इस लड़ाई को सफलतापूर्वक जीत रहा है। ये लड़ाई देश की है। हम सभी देश की इस लड़ाई में सहभागी बनें। सबके सहयोग से हम कोरोना को परास्त करने और जनता को स्वस्थ तथा सुरक्षित रखने में सफल होंगे।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में 15 अप्रैल से लॉकडाउन क्रमवार खोला जाएगा। इसलिए धर्मगुरुओं से अपील है कि वह इसे लेकर अपनी राय दें। उन्होंने कहा कि लॉकडाउन के बाद भी स्थिति बेहतर बनी रहे, इसे लेकर धर्मगुरुओं के पास कोई कार्ययोजना हो तो वह तत्काल के साथ लिखित रूप से सुझाव दे सकते हैं। मैं इसका स्वागत करुंगा।
उन्होंने कहा कि अपना देश कोरोना वायरस संकट के सेकेंड फेज में है। इसे थर्ड फेज में जाने से रोक दिया तो हम लोग व्यापक जनहानि से बच सकते हैं। भारत अभी तक कोरोना को नियंत्रित करने में सफल रहा है। सोशल डिस्टेंसिंग आगे भी बनाए रखने में धर्मगुरुओं की अहम भूमिका होगी। मुख्यमंत्री ने धर्म गुरुओं से कहा कि कोरोना के संक्रमण से बचाव के लिए लॉकडाउन का पालन कराएं। इसके साथ ही लॉकडाउन के बाद की स्थिति में भीड़ एकत्रित न होने दी जाए।
उन्होंने कहा कि वर्तमान में जो थोड़ी समस्या हो रही है, वह तात्कालिक है। सुरक्षित भविष्य के लिए ऐसा करना जरूरी है। जिन राज्यों ने सामाजिक दूरी बनाये रखने का पालन किया, उसके अच्छे परिणाम सामने आये हैं। बीमारी चेहरा, धर्म देखकर नहीं आती है। सावधानी का ही परिणाम है कि भारत के नतीजे सबसे अच्छे हैं। हमार देश इसे नियंत्रण करने में अच्छा प्रयास कर रहा है। इसलिए ताकतवार देश भी भारत से मदद ले रहे हैं। सबके सहयोग से अच्छी सफलता मिल रही है।
उन्होंने धर्मगुरुओं को कोराना वायरस के इलाज के मद्देनजर बनाई त्रिस्तरीय व्यवस्था के बारे में भी बताया। मुख्यमंत्री ने कहा कि एल-1, एल-2 और एल-3 अस्पतालों में इलाज के इंतजाम किए गए हैं। इसके साथ ही निजी अस्पताल भी इलाज के लिए आगे आये हैं। लोगों को नि:शुल्क राशन, दवा आदि से लेकर आर्थिक मदद की जा रही है। भोजन वितरण कराया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि धम गुरुओं से महत्वपूर्ण सुझाव राज्य की 23 करोड़ की आबादी को सुरक्षित रखने में मददगार होंगे। मुख्यमंत्री ने सबसे पहले वाराणसी के धर्मगुरुओं से बातचीत की। उन्होंने संकटमोचन मन्दिर के महंत, सतुआ बाबा आदि से वहां की व्यवस्था के बारे में पूछा। इस दौरान उन्होंने राहत कार्यों की भी जानकारी ली। इसके बाद सहारनपुर के धर्म गुरुओं से चर्चा की। उन्होंने मुख्यमंत्री से कहा कि सहयोग बनाकर काम करने से बेहतर नतीजे आ सकते हैं। सब मिलकर लड़ेंगे तो जीत निश्चित होगी।
इस दौरान उन्होंने सुझाव दिया कि जिनको क्वारंटाइन या आइसोलेशन में रखा गया है, उन्हें यह एहसास नहीं होना चाहिए कि उन्हें पकड़ा गया है। इसमें स्थिति संभालने के लिए सामाजिक लोगों का सहयोग लिया जा सकता है, इससे जहां व्यवस्था सफल होगी, वहीं शिकायतें भी नहीं आएंगी।
मुख्यमंत्री ने कहा कि वास्तव में प्रशास की भूमिका तटस्थ रहने की होती है। सरकार केवल सहयोग कर सकती है। बीमारी किसी व्यक्ति की गलती नहीं है। वायरस किसी पर भी आ सकता है। इसलिए सम्बन्धित लोग इसे छिपाने के बजाय उपचार के लिए आगे आयें। धर्मगुरु भी क्वारंटाइन या आइसोलेशन की अपील करें तो अच्छा असर पड़ेगा। इसके साथ ही उन्होंने मीडिया की भूमिका को लेकर भी उन्होंने अपनी राय दी, जिससे मुख्यमंत्री ने महत्वपूर्ण बताया।
इससे पहले आज मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रदेश से जुड़े केन्द्रीय मंत्रियों व सांसदों के साथ भी वीडियो काॅन्फ्रेंसिंग के जरिए संवाद स्थापित किया। उन्होंने कहा कि आम जनता को कोरोना वायरस कोविड-19 से बचाने तथा उनके स्वास्थ्य और सुरक्षित भविष्य के लिए लाॅक डाउन आवश्यक है। उन्होंने सांसदों से लाॅकडाउन से उत्पन्न स्थिति में गरीबों को राहत पहुंचाने के लिए राज्य सरकार द्वारा लागू योजनाओं को पात्र परिवारों तक पहुंचाने में सहयोग की अपील की।
मुख्यमंत्री ने कहा कि सांसदों का आम जनता से सीधा संवाद है। राज्य सरकार ने ठेला, खोमचा, पल्लेदार, रिक्शा, ई-रिक्शा आदि चलाने वाले दिहाड़ी मजदूरों को राहत पहुंचाने के लिए उनके बैंक खातों में 1000 रुपये भेजने की घोषणा की है, लेकिन ऐसे अधिकतर व्यक्तियों के बैंक खाते उपलब्ध नहीं हैं। बैंक खाते प्राप्त होने पर जिला प्रशासन द्वारा उनके खाते में सीधे 1000 रुपये भेजे जा सकते हैं। उन्होंने सांसदों से अनुरोध किया कि सोशल मीडिया, टेलीफोन आदि के माध्यम से ऐसे व्यक्तियों के खाते उपलब्ध कराने में सहयोग करें।
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