नई दिल्ली।कोरोना कहर को लेकर भारतीय रिजर्व बैंक के पूर्व गवर्नर रघुराम राजन ने केंद्र की मोदी सरकार को कुछ खास सुझाव अपने ब्लॉग के जरिेए सुझाए हैं। राजन ने साफ तौर पर चेताते हुए लिखा है कि कोरोनावायरस संक्रमण के कारण देशआजादी के बाद अब तक सबसे बड़े आपातकाली दौर से गुजर रहा है। ऐसे में सरकार को विपक्ष को साथ लेकर काम करने की जरूरत है।
इसके साथ ही पूर्व आरबीआई गवर्नर ने मोदी सरकार को गरीबों और जरूरत मंदों लोगों पर खर्च करने पर जोर दिया है, वहीं बेकार की फिजूलखर्ची पर रोक लगाने की नसीहत दी है। उन्होंने साफ कहा है कि मौजूदा समय में आर्थिक संकट 2008 की मंदी जैसा नहीं है। उस समय लोगों को पास रोजगार था, लेकिन मौजूदा वक्त में ऐसा नहीं है। इसलिए बहुत सोच-विचार कर कदम उठाने की जरूरत है।
इसके साथ ही रघुराम राजन ने गैर जरूरी खर्चों पर कटौती करने के साथ राज्यों सरकारों के साथ काम करने का सुझाव दिया है। राजन का कहना है कि सरकार को अपने सारे काम प्रधानमंत्री कार्यालय से चलाने पर कम जोर देना चाहिए। पीएमओ के कर्मचारी पहले से ही बोझ से दबे हुए हैं। अगर सारा काम वहीं से कराया गया तो राहत काम में बहुत देरी हो जाएगी। इसके साथ ही सरकार को फिलहाल बजटीय परेशानियों को नजरअंदाज कर देना होगा।
इसके साथ ही पूर्व गवर्नर ने केंद्र सरकार को विपक्ष का सहयोग लेने की अपील की है। इसकी वजह है कि विपक्ष के पास पिछले वैश्विक वित्तीय संकट से देश को बाहर निकालने का बड़ा तजुरबा है। विपक्ष को नजरअंदाज करने से कोरोना संक्रमण के खिलाफ लड़ाई कमजोर ही पड़ेगी। रघुराम ने कहा कि हमारे पास सीमित संसाधन हैं, जो चिंता की बात है। यहां हमें राज्यों और विपक्ष को साथ लेकर आगे बढ़ना होगा।
कोरोना महामारी से जूझने के लिए देश को बड़े स्तर पर टेस्टिंग और क्वारैन्टाइन की जरूरत है। साथ ही सोशल डिस्टेंसिंग भी बहुत जरूरी है। साथ ही गरीबों और कम आय वाले मध्य वर्ग के जीवनयापन पर भी हमें गौर करना होगा। आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के अकाउंट में प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण करना होगा।
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