नई दिल्ली. कोरोना वायरस महामारी (Coronavirus Pandemic) को रोकने के लिए केंद्र सरकार द्वारा किए गए देशव्यापी लॉकडाउन (Lockdown) में घरेलू और अंतरराष्ट्रीय उड़ानों पर लगी पाबंदी के बाद कैंसल हुए टिकटों का रिफंड ग्राहकों को नहीं देने पर केंद्र और डीजीसीए (DGCA) को सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को नोटिस जारी किया है. कोर्ट में दायर याचिका में कोरोना वायरस लॉकडाउन के कारण कैंसल किए गए एयर टिकटों (Air Tickets) का पैसा वापस करने का एयरलाइंस को निर्देश देने की मांग की गई है.

कोरोना वायरस महामारी को रोकने के लिए केंद्र सरकार द्वारा किए गए लॉकडाउन के कारण घरेलू तथा अंतरराष्ट्रीय उड़ानों को रद्द करना पड़ा है, जिसके कारण हजारों यात्रियों का पैसा एयरलाइंस कंपनियों के पास फंस गया है. वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए मामले की सुनवाई करने वाली न्यायमूर्ति एन. वी. रमण, एस. के. कौल तथा बी. आर गवई ने केंद्र सरकार तथा डीजीसीए को नोटिस जारी किया. सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिका में एयरलाइंस द्वारा कैंसल किए गए टिकटों का पूरा पैसा रिटर्न न करने की कथित कार्यवाही को सिविल एविएशन के नियमों का उल्लंघन घोषित करने का अनुरोध किया गया है.
याचिका दाखिल करने वाले एनजीओ प्रवासी लीगल सेल ने याचिका में कहा, एयरलाइन कंपनियों ने कैंसल किए गए टिकटों के फुल रिफंड के एवज में एक साल की वैधता के क्रेडिट शेल देने की बात कही है, जो मई 2008 में डीजीसीए द्वारा जारी सिविल एविएशन रिक्वायरमेंट का पूरी तरह उल्लंघन है. डीजीसीए ने साफ कहा है कि एयरलाइंस कंपनियों द्वारा क्रेडिट शेल में रिफंड अमाउंट डालने का विकल्प ग्राहक का विशेषाधिकार होगा और अपनी मर्जी से एयरलाइंस कंपनियां ऐसा नहीं कर सकती हैं.

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