कोरोना---तेरा खैर ना
                     --संजय कुमार अम्बष्ट
पाश्चात्य संस्कृति दिया कोरोना पैगाम
भारतीय संस्कृति करेगा काम तमाम ।
इह लीला देख ली मैंने तेरी सारी
कच्चूमर निकालूँगा ये दंभ है हमारी ।
धूप ,दीप,कपूर से भगवन पूजन न्यारी
 परोक्ष में है तेरी नाश की पूरी तैयारी ।
पूजन जब विधि से भगवान का होगा
तेरा बाप भी नहीं वहाँ प्रवेश करेगा ।
आलिंगन,कीटभक्षणनहींसंस्कृति मेरी
मास्क बात तू जो  आज कर रहा है
घूंघट मास्क चला सदियों सेआरहा है।
ताली थाली बजा तूझे बहरा किया हूँ
दिया,लाइट,बातीजलाअंधियादिया हूँ।
गिरने की अब है तेरी समय तुम्हारी
मसलने वास्ते सेनेटाइज बूट लिया हूँ।
शुरू हो गई तेरी दादी नानी का रोना
कोरोना------तेरा  अब  खैर  ना ।



स्टे होम,स्वच्छ,लिविंगडिस्टेंसबनानाहै
कोरोना  मुक्त  भारत  करना  है  ।
नाहीं गला लगाना, हाथ मिलाना है
हाथ जोड़ मुस्कुराते नमस्ते करना है ।
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