बुधवार को कैबिनेट बैठक के बाद केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने बताया कि राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति और राज्यपालों ने भी अपने वेतन में कटौती करने का फैसला लिया है. साथ ही प्रधानमंत्री, केंद्रीय मंत्री समेत सभी सांसदों के वेतन में 30 फीसदी कटौती होगी, जो एक अप्रैल से प्रभावी हो गई और यह अगले साल मार्च तक जारी रहेगी. सैलरी में यह कटौती उनकी बेसिक सैलरी से होगी.
दोनों सदन में 790 सांसद
संसद के दोनों सदनों के 790 सांसदों के वेतन से 30 फीसदी की कटौती होगी. सांसदों की सैलरी 1 लाख रुपये है तो प्रत्येक सांसदों की सैलरी से 30 हजार रुपये कटेंगे और इस तरह से हर महीने 23 करोड़ 70 लाख रुपये बचेंगे.
इसके अलावा प्रत्येक सांसदों को हर साल 5 करोड़ रुपये उनके सांसद निधि के तहत मिलता है जो अब 2 साल के लिए स्थगित कर दी गई है. सरकार ने वेतन में कटौती के लिए अध्यादेश भी जारी कर दिया है.
राष्ट्रपति की सैलरी 5 लाख
राष्ट्रपति की सैलरी 5 लाख रुपये है तो उपराष्ट्रपति को 4 लाख रुपये प्रति माह सैलरी मिलती है. जबकि राज्यपाल की सैलरी 3.5 लाख है तो केंद्र शासित प्रदेशों में तैनात उपराज्यपाल को 1.10 लाख रुपये सैलरी मिलती है.
इसी तरह से प्रधानमंत्री की सैलरी 2 लाख रुपये है, इतनी ही सैलरी केंद्रीय मंत्रियों को भी मिलती है. जबकि प्रत्येक सांसदों की सैलरी 1 लाख रुपये है. सांसदों की मासिक सैलरी के अलावा संसदीय क्षेत्र का मासिक भत्ता 70 हजार के अलावा अन्य भत्ते भी मिलते हैं जिसमें ऑफिस खर्च 60 हजार, फर्नीचर भत्ता 1 लाख (5 साल में 1 बार)
केंद्र सरकार की ओर से देश के शीर्ष पदों पर बैठे लोगों और सांसदों की सैलरी में 30 फीसदी की कटौती से करीब 25 करोड़ रुपये की बचत होगी.
सैलरी के अलावा केंद्र ने 2 साल के लिए सांसद निधि को स्थगित करने का फैसला लिया है. निधि को स्थगित किए जाने से करीब 7,900 करोड़ रुपये की बचत होगी जिसे सरकार के कोष में जमा कराया जाएगा.
केंद्र के फैसले से सरकार को करीब 8 हजार करोड़ रुपये की बचत होगी जिसका इस्तेमाल कोरोना के खिलाफ जंग लड़ने में किया जाएगा.
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