#अररिया
मानवीय जीवन की गरिमा होती है साहेब।
पद कोई भी हो, इंसान को इंसानियत नहीं भूलनी चाहिए।

एक तरफ बिहार के डीजीपी श्री गुप्तेश्वर पांडेय अपने पुलिसकर्मी को फोन कर मनोवल बढ़ा रहे है तो दूसरी ओर उन्हीं के जवान को सार्वजानिक जगहों पर अपमानित किया जा रहा है। आखिर इनकी गलती क्या थी? ये तो अपनी ड्यूटी में तैनात थे और बिहार के अररिया जिले के कृषि पदाधिकारी के गाड़ी को चेक पोस्ट पर रोक लिए। इतने में पदाधिकारी महोदय को मिर्ची लग गई। क्या इस जवान को पता होता कि यह किन्हीं बड़े साहेब का गाड़ी है तो वह नहीं रोकता। यह बस एक मानवीय भूल थी लेकिन बड़े साहेब ने तो उसे सार्वजानिक जगहों पर ही अपमानित करना शुरू कर दिए। इस तस्वीर में गौर से देखिए कि किस तरह से यह जवान पदाधिकारी के पैर के पास बैठ कर हाथ जोड़े खड़ा है। डीजीपी साहेब पद की हनक के सामने वर्दी की ताकत जीरो है। यह तस्वीर लगातार वायरल हो रहा है और इस तस्वीर को साथी जवान भी देख रहे होंगे। तो उन लोगों पर क्या बीत रही होगी। अब आप ही समझिए की कैसे कोई भी जवान किसी भी गाड़ी को रोकने की कोशिश करेगा?संदर्भ कुछ भी हो, क्या किसी पदाधिकारी को अधिकार है किसी के आत्मसम्मान को कुचलने का? अगर अघिकार है तो मनोवल बढ़ाने से क्या फायदा?


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