देश में 3 मई तक के लिए लॉकडाउन लागू है. लॉकडाउन को देखते हुए कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (ईपीएफओ) ने कंपनियों और अपने अंशधारकों को बड़ी राहत दी है.
30 दिन की मोहलत
इसके तहत अब नियोक्ता या कंपनी मार्च का पीएफ और अपनी अन्य सामाजिक कल्याण योजनाओं में योगदान का भुगतान 15 मई तक कर सकती है. अब तक इसकी डेडलाइन 15 अप्रैल की थी. मतलब ये कि 30 दिन की मोहलत दी गई है. ईपीएफओ के इस फैसले से छह लाख कंपनियों और 5 करोड़ से अधिक अंशधारकों को राहत मिलेगी. ईपीएफओ का यह फैसला कोरोना के दौरान कर्मचारियों के वेतन भुगतान के लिये नियोक्ताओं को एक प्रोत्साहन है.
श्रम मंत्रालय ने क्या कहा?
श्रम मंत्रालय ने एक बयान में कहा, ‘‘ कोरोना और लॉकडाउन को देखते हुए मार्च महीने का इलेक्ट्रॉनिक चालान सह रिटर्न (ECR) जमा करने की तारीख को आगे बढ़ाया जा रहा है. जिन नियोक्ताओं ने अपने कर्मचारियों को मार्च महीने की सैलरी दे दी है, यह राहत उन्हीं नियोक्ताओं के लिए है.' बयान के मुताबिक कर्मचारी भविष्य निधि एवं विविध कानून, 1952 (ईपीएफ एंड एमपी एक्ट) के अंतर्गत आने वाले प्रतिष्ठानों को 30 दिन की अतिरिक्त मोहलत दी गई है.
कैसे मिलेगा फायदा?
नियोक्ताओं को ईसीआर जमा करते समय मार्च महीने के वेतन वितरण की तारीख बताना है. जिन नियोक्ताओं ने अपने कर्मचारियों को मार्च महीने का वेतन दिया है, उन्हें न केवल ईपीएफ बकाया भुगतान के लिये अतिरिक्त समय दिया गया है बल्कि अगर वे 15 मई या उससे पहले उसे जमा कर देते हैं तो उन पर ब्याज और जुर्माने की भी देनदारी नहीं बनेगी.
बता दें कि ईपीएफओ ने लॉकडाउन लागू होने के बाद निकासी को लेकर कुछ बदलाव किए हैं. इसमें जन्मतिथि से लेकर बैंक खाता नंबर तक शामिल हैं. नियमों में बदलाव के बाद ईपीएफओ ने 279.65 करोड़ रुपये के 1.37 लाख निकासी दावों का निपटान किया है.

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