बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कहा कि देश में कब तक लॉकडाउन रहेगा, यह निर्णय केंद्र को लेना है क्योंकि केंद्र के पास देश-विदेश के तमाम विशेषज्ञों की सूचनाएं उपलब्ध हैं. नीतीश कुमार ने राज्य के बाहर रह रहे लोगों को बुलाने के लिए केंद्र सरकार से स्पष्ट नीति बनाने की मांग की. सोमवार को मुख्यमंत्रियों की प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ हुई वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के दौरान नीतीश कुमार ने कहा कि कोटा समेत अन्य राज्यों से छात्रों को बुलाने के लिए देश में एक नीति होनी चाहिए.
मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से कोटा मुद्दे पर स्पष्ट नीति बनाने की मांग की. बैठक में नीतीश कुमार ने कहा कि कोटा समेत अन्य राज्यों से छात्रों को वापस बुलाने के लिए एक ही नीति बननी चाहिए. उन्होंने कहा कि जब साफ कहा गया कि लोगों का आना-जाना बंद है, फिर भी कुछ राज्य बच्चों को बुला रहे हैं.
हम सिर्फ केंद्र के फैसले का पालन कर रहे हैं और बिहार की आलोचना हो रही है. बच्चों के अलावा नीतीश कुमार ने मजदूरों को लेकर भी नीति बनाने के लिए कहा. उन्होंने कहा कि बिहार केंद्र सरकार के नियमों के मुताबिक लॉकडाउन का पालन कर रहा है. जब तक नियमों में बदलाव नहीं होगा, तब तक हमारे लिए किसी को भी बिहार बुलाना संभव नहीं है.
नीतीश कुमार ने कहा कि 14 अप्रैल तक बिहार में 66 कोरोना पॉजिटिव केस थे. अब इसकी संख्या 290 हो गई है. राज्य के 22 जिलों के 48 प्रखंड में कोरोना पॉजिटिव मामले हैं, जबकि 56 मरीज स्वस्थ्य होकर घर चले गए हैं. उन्होंने कहा कि अभी बिहार में 6 लैब काम कर रही हैं, जिससे जांच में तेजी आई है. उन्होंने कहा कि हमलोग पूरे राज्य में डोर-टू-डोर स्क्रीनिंग करा रहे हैं. पल्स पोलियो के आधार पर चल रहे इस स्क्रीनिंग अभियान में 75 लाख परिवार के 4 करोड़ से ज्यादा लोगों की स्क्रीनिंग हो चुकी है.
मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कहा कि अभी भी राज्य में बाहर से लोग आ रहे हैं और उनमें से कई संक्रमित भी हैं जो अन्य लोगों को संक्रमित कर रहे हैं. उन्होंने प्रधानमंत्री से कहा कि मेरा विनम्र निवेदन है कि जो लोग भी बाहर से भेजे जा रहे हैं, उनके स्वास्थ्य की जांच पहले करा ली जाए.
मुख्यमंत्री ने कहा कि कोरोना के साथ-साथ अन्य बीमारियों के इलाज के लिए हमलोग अपनी स्वास्थ्य सेवाओं को बढ़ा रहे हैं. इसके लिए बिहार को अतिरिक्त वेंटिलेटर और टेस्टिंग किट की आवश्यकता है. हमने क्वारनटीन सेंटर की संख्या बढ़ा दी है, जिसमें काफी संख्या में लोग रह रहे हैं. उन्हें रहने के साथ-साथ भोजन और चिकित्सा उपलब्ध कराई जा रही है.
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