बिहार विधान परिषद की 27  सदस्यों का कार्यकाल समाप्त हो गया जिसमें 9 विधानसभा कोटे से 4 शिक्षक और चार स्नातक कोटे से वहीं 10 सीटें राज्यपाल कोटे से मनोनीत होकर आते थे जिनका कार्यकाल समाप्त हो गया।

कोविड19 के चलते लगाए गए लॉक डाउन में कई लोगों की रोजी-रोटी छिन गई है। सबसे ज्यादा असर किसानों और मजदूरों पर पड़ा है। लेकिन सबसे महत्वपूर्ण बात यह है इन किसानों और मजदूरों को रोजी-रोटी उपलब्ध कराने वाले लोगों का कार्यकाल समाप्त हो गया है।
बताते चलें बिहार विधान परिषद में 75 सीटें हैं। जिनमें 27 सदस्यों का कार्यकाल समाप्त हो चुका है। जिनमें 4 शिक्षक, 4 स्नातक क्षेत्र के सदस्य के अलावे 9 विधानसभा सदस्यों के द्वारा निर्वाचित सदस्यों का कार्यकाल 6 मई को और 10 राज्यपाल द्वारा मनोनीत सदस्य का कार्यकाल 23 मई को समाप्त हो गया। अभी तक यह सभी सीटें खाली है। अभी हाल में 12 सीटें जदयू की खाली हुई है जिनमें पेंच फंसता नजर आ रहा है।
भारतीय जनता पार्टी ने 12 सीटों में 5 सीटों पर दावा ठोका है। भाजपा के एक नेता ने कहा कि राज्यपाल द्वारा मनोनीत 12 सीटों में 5 सीटों पर भाजपा का हक बनता है। इसके लिए चुनाव कराने की जरूरत नहीं है। इस पर जल्द मनोनयन हो। साथ ही साथ विधान परिषद के सभापति का पद भी भाजपा को मिले।
अभी तक की परंपरा के अनुसार राज्य सरकार की अनुशंसा पर राज्यपाल सदस्यों का मनोनयन करते हैं। अब ऐसे में सवाल उठता है कि जब सीटें ही खाली है तो विधान परिषद में इन मजदूरों की हक की आवाज कौन उठाएगा ?


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