गुजरात के मेहसाणा के रहने वाले प्रह्लाद जानी उर्फ माताजी चुनरीवाले का निधन हो गया है। करीब 80 साल से बिना कुछ खाए-पिए रहने वाले बाबा जी विज्ञानिकों के लिए भी एक पहेली थे। प्रह्लाद जानी पूरी तरह से महिलाओं की तरह श्रृंगार करते थे, इसलिए, उन्हें चुंदडी वाली माताजी भी कहा जाता था।

प्रहलाद जानी ने बताया था कि जब वह 10 साल के थे तब उन्होंने अध्यात्मिक जीवन के लिए अपना घर छोड़ दिया था। एक साल तक वह माता अंबे की भक्ति में डूबे रहे, जिसके बाद उन पर माता की कृपा हुई और तब से न तो उन्हें भूख लगती है और न ही प्यास। इतना ही नहीं माता की भक्ति में लीन रहते-रहते वह साड़ी, सिंदूर और नाक में नथ पहनने लगे हैं और महिलाओं की तरह ही पूरा श्रृंगार करते हैं।
प्रह्लाद जानी का दावा था कि वह एड्स, एचआईवी जैसी गंभीर बीमारियों का इलाज सिर्फ एक फल देकर कर सकते हैं। यही नहीं, वह निसंतान व्यक्तियों का भी इलाज करने का भी दावा करते थे। पिछले 50 साल से गुजरात के अहमदाबाद से 180 किलोमीटर दूर पहाड़ी पर अंबाजी मंदिर की गुफा के पास रह रहे थे।

देश-विदेश के डॉक्टर सहित इसरो के वैज्ञानिक भी प्रह्लाद जानी के राज को जानना चाहते हैं। इसके लिए कभी देश की जानी-मानी संस्था डीआरडीओ के वैज्ञानिकों की टीम तो कभी बड़े-बड़े डॉक्टरों के पैनल ने सीसीटीवी कैमरे की नजर में प्रह्लाद जानी को 15 दिन से लेकर एक महीने तक 24 घंटे रखा। जहां उनके एक-एक सेकंड का वीडियो लिया गया। इस दौरान उन्होंने न तो कुछ खाया, न पिया और न ही शौचालय गए। उनके शरीर की अंदर की क्रियाओं के जानने के लिए डॉक्टरों ने उनके कई टेस्ट भी किए।
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