बरसों से बंद  मुजफ्फरपुर मोतीपुर और
 मोतिहारी,  चकिया के चीनी मिलों को भी चालू करवा दिया जाए तो 10000 से 15000 लोगों को  नौकरी मिलेगी, वहीं आसपास के सैकड़ों गांवों के किसान गन्ने की खेती कर अपने जीवन को खुशहाल बना पाएंगे.

दरअसल मोतीपुर चीनी मिल बरसों से बंद पड़ी हुई है और इसका सुध लेने वाला कोई नहीं है.

वर्ष 1933 में मोतीपुर चीनी मिल ने पहली बार धुआं उगला था. इसकी उत्पादन क्षमता सात सौ से एक हजार क्विंटल प्रतिदिन का था. चीनी की क्वालिटी ऐसी कि विदेश भेजी जाती थी. 1980 में मिल को निजी हाथों से सरकार के अधीन ले लिया गया. इसके पांच वर्ष बाद ही पहली बार मिल बंद हुई, जिसका कारण बताया गया मेंटेनेंस फिर चालू तो हुई मगर इसकी स्थिति दिन-प्रतिदिन बिगडऩे लगी. अंतत: 1996-97 में यह पूरी तरह से बंद हो गई.
और फिर क्या था, भू माफियाओं की तो जैसे चांदी हो गई. किसी प्राणी के मृत्यु का इंतजार जैसे गिद्ध करते हैं. इस मिल के बंद होने का माफिया को भी इंतजार था. इसकी 3500 सौ एकड़ से अधिक की जमीन में से लगभग 1500 एकड़ की जमीन पर कब्जा हो चुका है.

आज अगर यह चीनी मिल यहाँ फिर से शुरू हो जाए तो लगभग 10 से 15000 मजदूर इसमें कार्य करेंगे एवं आसपास के सैकड़ों गांवों के सभी किसान इससे जुड़ कर अपनी आर्थिक स्थिति में सुधार ला सकते हैं.

ऐसे ही न्यूज़ देखने के लिए हमारे पेज के लाइक फॉलो करें.                मैं चितरंजन कुमार मुजफरपुर से
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