हे बुद्ध!बहुत याद आयें
                   - संजय कुमार अम्बष्ट
   एक दिवस अति मुदित का आया
  पृथ्वी पर एक किरण प्रस्फुटित हुआ
  लुम्बिनी में जन्मे सिद्धार्थ नाम पाये
  शास्वत ज्ञान प्राप्ति से बुद्ध कहलाये
               हे बुद्ध! बहुत याद आये ।
  शयनित छोड़यशोधरा किये गृहत्याग
  बन  गये   हर्ष-    विमर्श-    वैरागी
 अचल दृगतारा से लगे लक्ष्यपे समान
   बोधि बृक्ष नीचे आखिर ज्ञान  पाये ।
               हे बुद्ध! बहुत याद आयें ।
   प्रथम उपदेश 'धर्म चक्र परिवर्तन
  पश्चात , आष्टांगिक मार्ग  कहलाये
   बना  जो आज सब सुखों का मूल
   प्रचलित धर्म बौद्ध धर्म  कहलाये ।
               हे बुद्ध! बहुत याद आये ।
    हिन्द ही नहीं विश्व में हैं छवि पाये
     विश्व समान ह्रदय स्वामी नाम पाये
    स्मरणकरके बहतेनयनों सेअश्रुधार
     बौद्ध धर्म देन हम बिसर ना पाये ।
                हे बुद्ध! बहुत याद आये ।

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