तस्वीरें बेगूसराय जिले के मंझौल की हैं।तस्वीरों में दिखायी जा रही सड़क मंझौल पुस्तकालय चौक(शहीद अमरेश द्वार)से दक्षिण संगत टोला तक   जाकर पूरब से मंझौल मुख्य बाजार(बस स्टैंड)को जाती है साथ ही संगत से पश्चिम कमला गाँव होते हुए पबड़ा तक जाती है।यह सड़क मंझौल के तीन पंचायतों(मंझौल 1,2 और 4) को जोड़ती है।पुस्तकालय चौक स्थित स्टेट बैंक ऑफ इंडिया,जीवन बीमा निगम कार्यालय व एस एच 55 किनारे स्थित प्राथमिक विद्यालय,मध्य विद्यालय,बालिका उच्च विद्यालय व जयमंगला उच्च विद्यालय,गाँव के चारों तरफ स्थित खेत-खलिहान,खेल के मैदान के साथ बाजार व दूध सेंटर जाने के लिए मुख्य रूप से उपयोग में आती है।गाँव का सबसे प्राचीन शिव मंदिर(वीरभद्र धाम,थुम्भ)भी इसी सड़क के किनारे है।इस तरह गाँव की 85 प्रतिशत आबादी के साथ आस-पास के गाँवों व बाहर से आनेवाले लोगों के लिए भी यह सड़क काफी महत्वपूर्ण और एकमात्र विकल्प है।वर्ष 2001 में तात्कालीन बीस सूत्री प्रभारी मंत्री गजेंद्र सिंह की अनुशंसा पर बेगूसराय डी. एम(वर्तमान प्रधान सचिव)आर.के.महाजन ने मंझौल पुस्तकालय चौक से फुलेना बाबू (सरपंच)के घर तक 1200 फीट निर्माण की स्वीकृति जे.ई.रामशंकर मिश्रा को प्रदान की थी।बाद के दिनों में सरपंच साहब घर से आगे की सड़क स्थानीय सांसद व पूर्व कृषि मंत्री रामजीवन बाबू की अनुशंसा पर बनी।उन्नीस वर्ष बीतने के बाद सड़क दम तोड़ने लगी है।गौरतलब है कि यह सड़क मंझौल पंचायत एक और दो के बीच स्थित है साथ ही पंचायत दो में सड़क के पूरब नाला भी बना हुआ है जिसका निर्माण गाँव के ही पूर्व मुखिया शकलदेव सिंह द्वारा करवाया गया और बाद के वर्षों में पूर्व मुखिया अरुण सिंह द्वारा इसका पुनर्निर्माण व समय-समय पर सफाई भी करवाई जाती रही।
वर्तमान में इस सड़क के पश्चिम मंझौल पंचायत एक में कोई नाला नहीं है,पंचायत दो का नाला भी पूरी तरह भरा हुआ है ऐसे में हल्की बारिश में भी सड़क पर अत्यधिक जल जमाव हो जाता है और नाले का पानी भी उपट कर सड़क पर ही बहता है।सड़क किनारे जगह-जगह जमा कूड़े-कचरे गोबर आदि भी पानी के साथ बहते रहते हैं।
           यदि पंचायत एक में इस सड़क से सटे पश्चिम भाग पर नाला निर्माण,पंचायत दो स्थित नाले के पानी निकासी की समुचित व्यवस्था व सड़क का पुनर्निर्माण हो जाए तो आगामी कम से कम बीस वर्ष तक इस इलाके के लोगों को जल जमाव व इससे उत्पन्न बीमारियों ,परेशानियों से निजात मिल सकती है।
विधानसभा चुनाव का बिगुल बज चुका है,बारिश और बाढ़ का भी सीजन चल रहा है ऐसे में देखना ये है कि इसको ध्यान में रखकर स्थानीय जनप्रतिनिधि,विधायक व सांसद इस समस्या पर संज्ञान लेकर समाधान की कोई पहल करते हैं या फिलहाल इस क्षेत्र के किसान,दुकानदार,दैनिक मजदूर,छात्र,श्रद्धालु भक्त जन व माँ बहनों को  परेशानी और समस्या से ही गुजरना होगा। Pallavi Kumari
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