पिथौरागढ़. चीन सीमा को जोड़ने वाली लिपुलेख सड़क (Lipulekh Pass) बनने के बाद बॉर्डर में ड्रैगन भारत पर दबाव (Indo-China Dispute) बनाने की कोशिशों में जुटा है. चीन ने लद्दाख सेक्टर में भारत द्वारा किए कंस्ट्रक्शन के साथ ही अब लिपुलेख में भी किए जा रहे अस्थाई निर्माण को लेकर आपत्ति जताई है. भारत ने अपनी सीमा में बॉर्डर से 800 मीटर पहले कुछ अस्थाई शेल्टर तैयार किए हैं, लेकिन चीन को ये रास नहीं आ रहे हैं. सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक चीनी सैनिक लिपुलेख पास के पार झंडा लहराकर टेम्परेरी स्ट्रक्चर को हटाने की चेतावनी दे रहे हैं.

पहले भी कर चुके हैं ऐसी हरकत चीनी

चीन की इस हरकत के बाद भारतीय सुरक्षा एजेंसी भी इस बॉर्डर पर अलर्ट मोड में आ गई हैं. बताया जा रहा है कि चीन के सैनिक ऐसी हरकत कई बार कर चुके हैं. बता दें कि लिपुलेख दर्रे को पार करने के बाद ही मानसरोवर यात्रियों और इंडो-चाइना ट्रेड में शिरकत करने वाले व्यापारी चीन में प्रवेश करते हैं. इसलिए इनके ठहरने के लिए भारत ने लिपुलेख दर्रे से 800 मीटर पहले ये अस्थाई शेल्टर बनाए हैं.

भारत ने तो मानसरोवर यात्री, भारतीय व्यापारियों के साथ ही जवानों के आराम करने के लिए बॉर्डर पर अस्थाई शेल्टर बनाए हैं लेकिन चीन नो लिपुलेख बॉर्डर के पार मात्र 200 मीटर की दूरी पर कई इलेक्ट्रॉनिक उपकरण लगाए हैं. इसे लेकर भारत ने कभी आपत्ति नहीं जताई.

दबाव बनाने की कोशिश

एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि जब से लिपुलेख सड़क कटी है, तभी से चीनी सैनिक बॉर्डर पर उकसावे की कार्रवाई कर रहे हैं. साथ ही उनकी ये भी कोशिश रहती है कि भारतीय सैनिकों पर दबाव बनाया जाए. यही नहीं चीन अब उन इलाकों को लेकर भी भारत पर दबाव बना रहा है, जिनको लेकर दोनों मुल्कों के बीच कभी विवाद नहीं रहा.

चीन काफी पहले ही लिपुलेख बॉर्डर के पार अपने इलाके में अच्छा-खासा डेवलपमेंट कर चुका है. अब यहां रोड पहुंचाने के बाद भारत की भी ये कोशिश है कि स्थानीय लोगों और सुरक्षा एजेंसियों के लिए ज़रूरी इंफ्रास्ट्रक्चर खड़ा किया जाए लेकिन चीन को भारत की ये कोशिशें बिल्कुल रास नहीं आ रहीं.
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