"सत्य मेव जयते, जय मां भारती"
(मेरे इंसाफ में तेरी आवाज़ की अहमियत):- भारत किसानों का राष्ट्र है, लेकिन यहां किसानों की आवाज लगाकर ही वोट बैंक को सुदृढ़ किया जाता है, और किसानों की स्थिति दयनीय है। हम भारत सरकार से संज्ञान लेना चाहते हैं कि कृषि को दो कि कर्ण का दर्जा क्यों नहीं दिया जा रहा है? आज किसान और मजदूर का हाल बेहाल है। जबकि मजदूर और किसान आर्थिक दृष्टि या सामाजिक दृष्टिकोण से राष्ट्र के रीढ़ माने जाते हैं, धरातलीय स्तर नहीं बल्कि आकाशीय स्तर पर अर्थात तात्पर्य है कि इनके लिए केवल शब्द से सजा दिया जाता है लेकिन कर्तव्य निभाना असंभव होता है। आज विज्ञान को मृत घोषित कर विज्ञापन को प्रोत्साहित किया जा रहा है। बिहार की जो भी कल कारखाने हैं जैसे जूट मील, कागज मील, चीनी मील इत्यादि हिंदी के सारे बंद पड़ी हुई हैं। यदि उसे चालू कर दिया जाए तो हमारे बिहार के प्रिय मजदूरों को किसी प्रदेश में रोजी रोटी है हेतु नहीं जाना पड़ेगा। अतः बिहार की सरकार से निवेदन है कि नाम कल कारखानों को खोलने की उचित प्रक्रिया को अपनाया जाए और इन कंपनी को खोला जाए। बिहार सरकार पारा शूटर नहीं बल्कि ग्रास शूटर बन बिहार के पवित्र धारा पर कार्य करने का प्रयास एवं मार्ग को प्रशस्त करे। यदि जिस दिन कृषि औद्योगिकीकरण की दर्जा प्राप्त हो जाती है तो हमारे कृषकों को सरकार के द्वारा दिए गए कर्ज को माफ करने की आवश्यकता नहीं पड़ेगी और आर्थिक स्थिति में भी काफी सुधार भी होगी। आज की स्थिति ऐसी नाजुक दौर से गुजर रही है। चाहे प्रदेश स्तर की सरकार हो या राज राष्ट्रीय स्तर की, यह दोनों सरकार कुर्सी बचाओ अभियान में विकास के मुद्दों को भूलकर जातिगत एवं धर्म के आधार पर वोट बनाने के दौरान अहिंसा के मार्ग को अपनाकर हिंसा के मार्ग को अपना रही हैं। जो राष्ट्र हित के लिए काफी खतरनाक है। जिससे समाज में प्रतिद्वंद्विता की भावना जनता में काफी तीव्र गति से भर रही है। आज 'सत्यमेव जयते' के आधार पर जीने वाले व्यक्तियों पर तानाशाह काकू शासन व्यवस्था का मोहर लगाकर जनता को ही गुमराह किया जा रहा है। ग्रास सूटर के तत्वधान में कार्य 0% है और पारा सूटर की सूची में 100% कार्य को दर्शाया जा रहा है। सरकार को समुंद्र बांध अन्य नदी रोटी धर्म एवं जाति के लोगों को शरणागति दे कर समाज को सुधारने का प्रयास करना चाहिए परंतु आज ठीक इसके विपरीत दिशा में लोगों को संज्ञान कराया जा रहा है जिससे जनता में एक दूसरे के प्रति प्रतिद्वंदिता एवं द्वेष की भावना काफी चरम सीमा को पार कर रही है।(किसान समाज पार्टी (एस) बिहार प्रदेश प्रवक्ता दीपक ओझा 
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