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सांप  आमंत्रित   किये  तो  नेवले  सब  आ  गए
न्यूज़  लाइव,  बद्ज़बानी,  चोंचले  सब  आ गए

हम  कहेंगे  वो  कि  जो  महसूस  हम करते  रहे
बोलना  हमको   सिखाने  तोतले  सब   आ  गए

मां-बहन की गालियां  होंठो  पे जिनके हैं  सजी
संस्कारों   को    बचाने   दोगले   सब   आ  गए

जुस्तज़ू  तेज़ाब  बनकर घूमती  रग - रग  मे  है
नोचने  को  जिस्म  मादा दिलजले सब  आ गए 

बादशाहत  में   तुम्हारी  न्याय  पर  तलवार  थी
आज   बारी   है   हमारी  फैसले  सब  आ  गए

शीतऋतु  में  'भूत' जिसकी डाल पर लटके  रहे
गर्मियां  आयीं  तो  पीपल के  तले  सब आ गए

आज   दहशतगर्द  जो  हैं  सामने  आकर  खड़े
पूर्व  की  अनदेखियां,  फूलेफले, सब  आ   गए

#नज़्मसुभाष
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