तस्वीरें राज्य मार्ग संख्या पचपन(इसी जगह भारतीय स्टेट बैंक,भारतीय जीवन बीमा निगम,कार्यालय भी है) स्थित मंझौल *पुस्तकालय चौक* से दक्षिण *शहीद अमरेश स्मृति द्वार* के नीचे गुजरती *शहीद अमरेश पथ*(इस सड़क का यह नाम मेरे द्वारा प्रस्तावित किया गया है)की हैं।
इसी पथ पर आगे *वीरभद्र धाम(थुम्भ)* है।आज सावन की तीसरी सोमवारी और सोमवती अमावस्या होने से *बाबा वीरभद्र महादेव मंदिर थुम्भ* पर प्रातःतीन बजे से ही ग्रामवासियों,श्रद्धालु भक्त जनों एवं माँ-बहनों का ताँता लगा है।समस्त गाँव के लोग *थुम्भ* तक इसी पथ से पहुँचते हैं।यह सड़क आगे एयरटेल टावर के पूरब से पचमहला टोला होते हुए गाँव को मुख्य बाजार से जोड़ती है।यही सड़क दक्षिणी छोर पर संगत टोला से पश्चिम होते हुए कमला,पबड़ा,ठाठा और मेहदा शाहपुर  को जाती है।साथ ही पूर्वी छोर से मंझौल बाजार होकर राज्य मार्ग पचपन से जुड़ती है।
गाँव की एक तिहाई आबादी के अतिरिक्त बाहरी एवं पड़ोसी गाँव के लोगों की आवाजाही इसी सड़क से होती है।विदित हो कि इस सड़क और सड़क से पूरब (पंचायत-02)सटे नाले का निर्माण 19 वर्ष पहले ही हुआ था।विगत 7 वर्षों से इस सड़क पर जलजमाव की स्थिति रहती है।इधर के 3 वर्षों में तो स्थिति बद से बद्तर और नारकीय बनी हुई है।
एक तो कोरोना का भीषण संक्रामक संकट ऊपर से बारिश और वर्षा जल में  घुले-मिले नाले के पानी के बजबजाते कीड़े,गोबर व अन्य पशुओं के मल-मूत्र,कचरे आदि मिलकर कोढ़ में खाज जैसी स्थिति पैदा कर रहे हैं।
इस सड़क से सटे (पंचायत-01)पश्चिम में अविलम्ब एक नाले का निर्माण अति आवश्यक होने के साथ-साथ सड़क का पुनर्निर्माण भी जरूरी है।
वर्तमान में इस समस्या के उचित व त्वरित समाधान हेतु कम से कम गाँव के दोनों पंचायतों(मंझौल एक एवं दो)के मुखिया,पंचायत समिति सदस्य,सरपंच,सभी प्रभावित वार्ड के वार्ड सदस्य एवं जिला पार्षद गाँव में मौजूद हैं।मौजूद तो वे लोग भी हैं जो इस समस्या से सीधे-सीधे प्रभावित हैं।खैर ये बेचारे लोग हैं।इन्होंने लगातार दो बार सत्ताधारी दल के वर्तमान विधायक व मंत्री को खुला समर्थन देकर अपार बहुमत दिलाने में घनघोर भूमिका निभायी।ये बात दीगर है कि पिछले दस वर्षों में ये समस्या उन तक पहुँची नहीं या उन्होंने पहुँचने न दिया लेकिन आज भी मुख्यमंत्री की महत्वाकांक्षी *सात निश्चय*एवं *जल,जीवन,हरियाली* परियोजना प्रसंगाधीन ही है।उनके मुताबिक हर गाँव में सड़क,बिजली,पीने का पानी,स्वच्छता,शिक्षा, चिकित्सा व रोजगार उपलब्ध है।घिसट-घिसट कर ही सही विकास तो हो ही रहा है।*बेरोजगार युवकों द्वारा उपरोक्त* *मूलभूत मुद्दों को भूलकर राजनीतिक दलों का झण्डा ढोना और तथाकथित नेताओं की जयजयकार करने से* *अच्छा रोजगार भला क्या हो सकता है?*
बड़े उत्साह में भरकर हर-हर ... का नारा लगाते हुए इन्हीं लोगों ने सांसद को भी अपार बहुमत से जितवाया।
लेकिन यह इस समय की सबसे बड़ी त्रासदी है कि आज तमाम अभाव,संकट,रोग,समस्याओं के समाधान हेतु अपने चुने हुए जनप्रतिनिधियों से प्रश्न पूछना या संवाद की कोशिश करना भी लोग नहीं चाहते।जो ऐसा करते हैं उन्हें गाली,अपमान और न जाने क्या-क्या भुगतना पड़ता है।
मैं स्वयं कई यातनाएँ झेलकर भी इन मुद्दों को उठाने का प्रयास करता रहा हूँ।मेरे द्वारा प्रेषित 
इस सड़क की खबर को प्रकाशित करने के लिए मैं बेगूसराय टुडे के कुमार गौरव भाई और स्पीड भारत न्यूज की बहन पल्लवी कुमारी का आभारी हूँ।आज के हिंदुस्तान में भी इस सड़क की बदहाली की खबर छपी है।दैनिक भास्कर व दैनिक जागरण में तो पहले ही कई बार छप चुकी है।बावजूद इसके इस मंझौल अनुमंडल के प्रशासनिक अधिकारी गाँव की समस्या के प्रति उदासीन हैं।सांसद तो जीतने के बाद दिखते ही नहीं,विधायक को कभी मतलब ही नहीं रहा।
असल में इस क्षेत्र की जनता को भी मतलब नहीं है।
अगर लोग अपने मूलभूत अधिकारों और कर्तव्यों के प्रति जागरुक होते तो स्थितियां भिन्न होतीं।
आखिर मैं क्यों यह सब आपसे साझा कर रहा हूँ?मेरी औकात ही क्या है?
मेरी औकात तो तब भी नहीं थी जब 19 वर्ष पहले इस सड़क के निर्माण हेतु आवेदन लिखा था और मेरे स्वजनों के प्रयास से ही सही काम तो हो गया था।
खैर सामाजिक समस्याओं के निराकरण में भागीदारी निभाना हर सामाजिक नागरिक का धर्म है।इसमें कोई विशेष बात नहीं।
तब भी लिखा था,अब भी लिख ही रहा हूँ क्योंकि..
यदि आप वर्तमान व्यवस्था से संतुष्ट नहीं
तो
*विसंगतियों के खिलाफ बोलिए*
*बोल नहीं सकते तो लिखिए*
*लिख नहीं सकते तो जो लिख और बोल रहे हैं उनको हौसला दीजिए*
अगर यह सब भी नहीं कर सकते तो चुप-चाप भुगतिये *लेकिन लिखने और बोलने वालों को हतोत्साहित मत कीजिए।*
बाकी इस मैसेज को पढ़नेवाले सभी लिखे-पढ़े ,बुद्धिमान,विवेकवान,जिम्मेदार नागरिक तो होंगे ही,स्वयं ही विचार कीजिए न।परिवर्तन चाहेंगे तो परिवर्तन जरूर होगा।एक बार चाहकर तो देखिए।

मनीष कुमार झा 
Share To:

Post A Comment: